मध्य प्रदेश में आत्मनिर्भर ऊर्जा की दिशा में ऐतिहासिक कदम, भोपाल जिले में एक गांव को पूरी तरह सौर ऊर्जा पर आधारित बनाया जाएगा। जिला प्रशासन ने 15 दिन के भीतर गांव चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार अब सौर ऊर्जा को ग्रामीण विकास से जोड़ने जा रही है। राजधानी भोपाल जिले में जल्द ही राज्य का पहला सोलर गांव बसने जा रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पूरे गांव की बिजली ज़रूरत सिर्फ सोलर पैनल से पूरी की जाएगी। अगले 15 दिनों में गांव का चयन कर काम की शुरुआत होगी। इससे न सिर्फ ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि भोपाल को सोलर कैपिटल बनाने की दिशा में एक ठोस कदम होगा।
भोपाल का पहला सोलर गांव
भोपाल जिले में बनने जा रहा है राज्य का पहला "सोलर ग्राम"।गांव की पूरी बिजली आपूर्ति सौर ऊर्जा से की जाएगी।जिला कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।अगले 15 दिन में गांव का चयन और प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी।लीड बैंक को फाइनेंसिंग की जिम्मेदारी दी गई है।
भोपाल में बढ़ता सोलर उत्पादन
भोपाल में फिलहाल 32,000 से अधिक सोलर पैनल स्थापित हैं। कुल 1.92 लाख किलोवॉट क्षमता से हर दिन 7.68 लाख यूनिट बिजली उत्पन्न हो रही है। नगर निगम के 93 भवनों की छतों पर 20 किलोवॉट प्लांट लगाकर हर दिन 7200 यूनिट उत्पादन संभव। प्रशासन के 75 भवनों पर भी 6000 यूनिट प्रतिदिन बिजली उत्पादन का लक्ष्य।
भविष्य की सोलर कैपिटल की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री ने 25,000 नए सोलर प्लांट और 900 मेगावाट उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।केवल सरकारी इमारतों की छतों से ही 35,000 यूनिट बिजली रोज़ाना पैदा करने की योजना है।यह कदम भोपाल को ऊर्जा आत्मनिर्भर और पर्यावरण-अनुकूल बनाने में अहम साबित होगा।
फायदे क्या होंगे?
गांव को मिलेगा मुफ्त या सस्ती बिजली का लाभ।
कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण संरक्षण।
ग्रामीणों को जागरूकता और नई तकनीकों से जोड़ने का अवसर।
लंबे समय में ऊर्जा खर्च में भारी कटौती।