देश में पराली जलाने के मामलों को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। इस बार मध्यप्रदेश ने पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। गेहूं की फसल कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ अप्रैल के शुरुआती दिनों में ही हजारों मामले सामने आ चुके हैं, जिससे पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
मध्यप्रदेश बना पराली जलाने में अव्वल
देशभर में पराली जलाने के मामलों में मध्यप्रदेश सबसे ऊपर पहुंच गया है। अप्रैल के पहले 23 दिनों में राज्य में 20 हजार से ज्यादा घटनाएं दर्ज की गईं। कुल मामलों में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी करीब 69 प्रतिशत बताई जा रही है। यह स्थिति तब है, जब राज्य में पराली जलाने पर पूरी तरह रोक लगी हुई है।
इन जिलों में सबसे ज्यादा मामले
जिला स्तर पर देखा जाए तो विदिशा सबसे आगे है, जहां 2000 से ज्यादा घटनाएं सामने आईं। इसके बाद उज्जैन, रायसेन, होशंगाबाद और सिवनी का नंबर आता है। इन इलाकों में किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर पराली जलाई जा रही है, जिससे हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
पिछले साल से थोड़ा कम, पर खतरा बरकरार
आंकड़ों के अनुसार इस साल के मामले पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम हैं, लेकिन अंतर ज्यादा नहीं है। पिछले साल भी 20 हजार से अधिक घटनाएं सामने आई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार रही तो इस साल नया रिकॉर्ड बन सकता है।
कम मामले वाले जिले भी सामने आए
कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां पराली जलाने के मामले बहुत कम हैं। इनमें मुरैना, अलीराजपुर, सिंगरौली, बालाघाट और अनुपपुर शामिल हैं। इन इलाकों में जागरूकता और सख्ती का असर देखने को मिल रहा है।
नियम के बावजूद नहीं रुक रही घटनाएं
राज्य में पराली जलाने पर रोक है और नियम तोड़ने पर जुर्माना, एफआईआर और सरकारी योजनाओं का लाभ बंद करने जैसे प्रावधान हैं। इसके बावजूद किसान पराली जला रहे हैं। इससे साफ है कि नियमों के पालन में अभी और सख्ती और जागरूकता की जरूरत है।