अब डायबिटीज मरीजों को बार-बार सुई चुभाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मध्यप्रदेश की एक होनहार छात्रा ने ऐसा डिवाइस बनाया है, जो सांस के जरिए ब्लड शुगर लेवल बता देता है। इसका नाम है 'शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0'। बालाघाट की इस छात्रा ने यह इनोवेशन बिना किसी हाईटेक लैब या बड़े संसाधनों के सिर्फ अपने आइडिया और मेहनत से तैयार किया है। डिवाइस न सिर्फ सुरक्षित है, बल्कि बेहद आसान भी है। मरीज को बस इसमें हल्की सी फूंक मारनी है और यह बता देगा कि आपका शुगर लेवल हाई है, लो या सामान्य। इस तकनीक को भारत सरकार ने पेटेंट भी दे दिया है, और इसे दिल्ली के नेशनल यूथ फेस्टिवल में भी प्रदर्शित किया जा चुका है।
अब बिना खून निकाले होगी शुगर की जांच
अभी तक डायबिटीज चेक करने के लिए ब्लड सैंपल लेना जरूरी होता है। लेकिन बालाघाट की अभिलाषा नाम की छात्रा ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। उसका डिवाइस ‘शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0’ सांस में मौजूद केटोन बॉडीज को जांचता है, जिससे यह पता चलता है कि शरीर में ग्लूकोज का स्तर कितना है।
तीन लेवल में देता है रीडिंग
छात्रा अभिलाषा ने बताया कि जब कोई व्यक्ति डिवाइस में फूंक मारता है, तो यह ‘लो’, ‘मॉडरेट’ और ‘हाई’ तीन श्रेणियों में रीडिंग देता है। यह इंडिकेशन ब्लड शुगर लेवल की स्थिति को साफ-साफ दर्शाता है। यह तकनीक खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी होगी जो सुई से डरते हैं या बार-बार टेस्ट नहीं करवा पाते।
सरकारी मान्यता और पेटेंट मिल चुका है
‘सृजन-2025’ कार्यक्रम के तहत राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल में इस डिवाइस को टॉप 150 नवाचारों में जगह मिली है। भारत सरकार ने इस इनोवेशन को पेटेंट भी दे दिया है। विशेषज्ञों ने इसे भरोसेमंद, सुरक्षित और आने वाले समय के लिए कारगर बताया है।
गांव से ग्लोबल तक की उड़ान
अभिलाषा बालाघाट के JST PG कॉलेज की छात्रा हैं और यह डिवाइस उनकी मेहनत, सोच और इनोवेशन की मिसाल है। यह इनोवेशन गांव के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन सकता है कि सीमित संसाधनों में भी कुछ नया और बड़ा किया जा सकता है।