MP Teacher Recruitment Digvijaya Singh ---भोपाल में शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब सियासी रंग लेता दिखाई दे रहा है। 15 दिन से नीलम पार्क में भूख हड़ताल कर रहे शिक्षक वर्ग-1, 2 और 3 के उम्मीदवारों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहुंचे और उनके साथ धरने पर बैठे। इससे एक दिन पहले ही प्रदर्शनकारियों ने जन्माष्टमी के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला रोककर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा था।
शिक्षक दिवस पर अभ्यर्थियों के बीच पहुंचे दिग्विजय
शिक्षक वर्ग-2 और वर्ग-3 के अभ्यर्थी पिछले 15 दिनों से भोपाल के जहांगीराबाद स्थित नीलम पार्क में भूख हड़ताल और प्रदर्शन कर रहे हैं। शिक्षक दिवस के मौके पर दिग्विजय सिंह प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और उनके साथ धरने पर बैठे। इससे पहले भी वे आंदोलन में शामिल हो चुके हैं और अभ्यर्थियों की मांगों को उचित बताते हुए दोबारा उनके बीच आने की बात कही थी।
5819 पदों पर काउंसलिंग की मांग
वर्ग-1 चयन परीक्षा 2023 के अभ्यर्थियों का कहना है कि वे करीब तीन साल से पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा 2023 में 8720 पद विज्ञापित हुए थे, लेकिन पहली काउंसलिंग में 2901 पदों पर नियुक्तियां हुईं। अभ्यर्थी बाकी 5819 पदों पर काउंसलिंग कराने की मांग कर रहे हैं।
वर्ग-2 में 10 हजार, वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग
वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती 2025 के उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर पद बढ़ाने की मांग रखी है। वर्ग-2 में कम से कम 10 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग की गई है। इसके अलावा विषय शिक्षक, खेल, संगीत, नृत्य, गायन और वादन सहित विभिन्न विषयों में अतिरिक्त पद स्वीकृत करने की मांग भी सामने आई है।
रिक्त पदों का हवाला देकर सरकार से जवाब मांग रहे अभ्यर्थी
अभ्यर्थियों ने स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग में बड़ी संख्या में शिक्षक पद रिक्त होने का हवाला दिया है। उनका दावा है कि 27 दिसंबर 2024 तक दोनों विभागों में माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के लाखों पद रिक्त थे, जबकि मौजूदा भर्ती में इनके मुकाबले काफी कम पद शामिल किए गए हैं। इसी आधार पर वे भर्ती का दायरा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
15 हजार स्वीकृत पद मौजूदा भर्ती में जोड़ने की मांग
अभ्यर्थियों ने बजट सत्र में स्वीकृत 15 हजार शिक्षक पदों को वर्ग-2 और वर्ग-3 की मौजूदा भर्ती में शामिल करने की मांग भी उठाई है। उनका तर्क है कि इससे नई भर्ती और अलग परीक्षा आयोजित करने में लगने वाला समय और सरकारी खर्च दोनों बच सकते हैं। अब दिग्विजय सिंह के आंदोलन में पहुंचने के बाद इस मुद्दे पर सियासी हलचल भी बढ़ गई है।