मध्यप्रदेश ने एक बार फिर कृषि क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। अब यह राज्य टमाटर उत्पादन में पूरे देश में नंबर-1 बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों, 50% बीज अनुदान और पीएमएफएमई योजना के चलते किसानों को जबरदस्त आर्थिक मजबूती मिली है। खेतों में ‘लाल सोना’ यानी टमाटर उगाकर किसान अब आत्मनिर्भर बन रहे हैं और वैल्यू चेन से जुड़कर नए उद्योगों की ओर बढ़ रहे हैं।
कृषि नीति और तकनीक से बदली तस्वीर
मध्यप्रदेश में टमाटर की खेती अब पारंपरिक न रहकर तकनीकी हो चुकी है। नई किस्मों के बीज, ड्रिप सिंचाई, और उन्नत कृषि उपकरणों के उपयोग ने उत्पादन क्षमता को दोगुना कर दिया है। सरकार द्वारा 50% बीज सब्सिडी देने से किसानों की लागत आधी हो गई है। इससे छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों में भी टमाटर उत्पादन को लेकर उत्साह बढ़ा है।
PMFME योजना से बढ़े टमाटर आधारित उद्योग
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन (PMFME) योजना ने किसानों को खेती से आगे बढ़कर उद्यमिता की राह दिखाई है। इस योजना के तहत टमाटर प्रोसेसिंग, सॉस, केचप और प्यूरी बनाने वाले छोटे उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब किसान केवल फसल बेचने तक सीमित नहीं, बल्कि उससे मूल्यवर्धित उत्पाद बनाकर अपनी आय कई गुना बढ़ा रहे हैं।
किसान बन रहे आत्मनिर्भर
सागर, इंदौर, छिंदवाड़ा, धार और रतलाम जैसे जिलों में हजारों किसान अब टमाटर की वैल्यू चेन में सक्रिय हैं। सरकार के सहयोग और किसानों की मेहनत ने मध्यप्रदेश को “टमाटर का बादशाह” बना दिया है। यह सफलता आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है।