मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों में आदिवासी पूजा स्थलों को अब ‘देवलोक’ के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय की आस्था से जुड़े स्थलों को संरक्षण और संवर्धन मिलेगा। अभी तक केंद्रीय वन कानूनों के चलते पक्के निर्माण की अनुमति नहीं है, लेकिन राज्य सरकार ने केंद्र से समन्वय कर रास्ता निकालने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। यह परियोजना आदिवासी संस्कृति और जैव विविधता को सहेजने का प्रयास है।
देवलोक की परिकल्पना
सीएम ने कहा कि वनांचल में ऐसे कई क्षेत्र हैं जिन्हें स्थानीय आदिवासी समुदाय आस्था और परंपरा के आधार पर संरक्षित करते आए हैं। सरकार इन स्थलों को देवलोक वन के रूप में विकसित करेगी ताकि पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक आयोजन और पारंपरिक महोत्सव यहां बेहतर तरीके से हो सकें।
कानूनी चुनौती
वन क्षेत्रों में केंद्रीय कानूनों के तहत पक्के निर्माण पर रोक है। किसी भी तरह की सड़क, भवन या अन्य संरचना के लिए केंद्र और राज्य दोनों की अनुमति जरूरी होगी। फिलहाल देवलोक परियोजना में फेंसिंग, ग्रेवल रोड और पेविंग ब्लॉक जैसे अस्थायी निर्माण पर विचार किया जा रहा है।
बजट और योजनाएँ
राज्य सरकार ने परियोजना के लिए 3.37 करोड़ रुपये का प्रावधान करने का निर्णय लिया है। ग्राम सभा स्तर पर प्रति ग्राम सभा 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही भगोरिया जैसे पारंपरिक आदिवासी त्योहारों को राज्य स्तर पर मनाने की योजना भी बनाई जा रही है।
राजनीतिक संदेश
रीवा में श्रद्धांजलि सभा के दौरान सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष धार्मिक कार्यों में बाधा डालता है और अर्बन नक्सलवादी मानसिकता से काम करता है। उन्होंने जनता से ऐसे दलों को सबक सिखाने की अपील की।