मध्यप्रदेश को देश का जनजातीय दिल कहा जाए तो गलत नहीं होगा, क्योंकि यहां भारत की सबसे ज्यादा आदिवासी आबादी निवास करती है। यहां की जनजातियां सदियों पुरानी परंपराओं और विश्वासों के साथ आज भी जीवन जीती हैं। ये परंपराएं न सिर्फ उनकी सांस्कृतिक पहचान हैं, बल्कि एक अनोखी विरासत का प्रतीक भी हैं। इन आदिवासी समाजों की कई मान्यताएं और रिवाज ऐसे हैं, जो आम जनजीवन से काफी अलग होते हैं। इनमें से कुछ परंपराएं तो इतनी खास हैं कि उनके बारे में जानना किसी रोमांच से कम नहीं। चाहे वह ‘दूध लौटावा विवाह’ हो या ‘डोल जतरा’, हर एक परंपरा में उनकी संस्कृति की झलक मिलती है। आइए जानते हैं मध्यप्रदेश की 5 अजीब लेकिन दिलचस्प आदिवासी परंपराओं के बारे में, जिनके बारे में आप शायद ही जानते होंगे।
दूध लौटावा विवाह (Milk Return Marriage)
गोंड जनजाति में यह अनोखी परंपरा देखने को मिलती है, जहां लड़की की शादी ममरे या फुफेरे भाई से करवाई जाती है। इसे पारंपरिक रूप से शुभ और उचित माना जाता है।
डोल जतरा
सीहोर जिले में प्रचलित इस परंपरा में महिलाएं 15 फीट ऊंचे खंभे पर चढ़ती हैं और झूले को छूने के बाद बेहोश हो जाती हैं। बाद में उन्हें होश में लाया जाता है।
घोटुल परंपरा
मुरिया और मारिया जनजाति की यह परंपरा युवाओं को सामूहिक झोपड़ी ‘घोटुल’ में रहने और जीवन साथी चुनने की स्वतंत्रता देती है।
सहरिया नृत्य
होली के मौके पर सहरिया जनजाति पारंपरिक संगीत और ताली बजाते हुए सामूहिक नृत्य करती है, जो उनकी संस्कृति का अहम हिस्सा है।
जकिया परंपरा
इस परंपरा में दूल्हे का परिवार, दुल्हन के परिवार को एक घोड़ा भेंट करता है, जो सम्मान और सामाजिक स्थिति का प्रतीक माना जाता है।