मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बड़े बदलाव किए गए हैं। अब सिर्फ साथ रहना ही काफी नहीं होगा, बल्कि लिव-इन शुरू होने के 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना भी अनिवार्य होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। आइए जानते हैं नए कानून में लिव-इन से जुड़े कौन-कौन से नियम लागू होंगे।
30 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा अनिवार्य
यूसीसी के तहत लिव-इन रिलेशनशिप शुरू होने के 30 दिनों के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार के पास इसकी जानकारी देना और डिक्लेरेशन जमा करना जरूरी होगा। यह प्रावधान अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को छोड़कर प्रदेश के अन्य सभी लोगों पर लागू रहेगा।
21 साल से कम उम्र होने पर माता-पिता को मिलेगी सूचना
यदि लिव-इन में रहने वाले दोनों में से किसी एक की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो रजिस्ट्रार इस संबंध की जानकारी उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक को देगा। इसका उद्देश्य कम उम्र के युवाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना है।
पुलिस के पास भी रहेगा लिव-इन का रिकॉर्ड
रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद संबंधित रजिस्ट्रार लिव-इन रिलेशनशिप का रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस थाने को भेजेगा। इसके अलावा यदि कोई जोड़ा अपना लिव-इन संबंध समाप्त करना चाहता है, तो उसे भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रार के समक्ष आवेदन देना होगा।
नियम तोड़े तो जेल और जुर्माने का प्रावधान
नए कानून के अनुसार बिना रजिस्ट्रेशन लिव-इन में रहने पर तीन महीने तक की जेल और 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि नोटिस मिलने के बाद भी नियमों का पालन नहीं किया जाता, तो सजा बढ़कर छह महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक के जुर्माने तक पहुंच सकती है। वहीं, रजिस्ट्रेशन के दौरान गलत जानकारी देने पर भी तीन महीने की जेल और 25 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
शादीशुदा व्यक्ति, बच्चों के अधिकार और भरण-पोषण का नियम
कानून के मुताबिक, पहले से विवाहित व्यक्ति कानूनी रूप से तलाक लिए बिना किसी अन्य के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं रह सकेगा। ऐसा करने पर पांच साल तक की जेल का प्रावधान है। यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो महिला अदालत के माध्यम से भरण-पोषण की मांग कर सकती है। वहीं, लिव-इन से जन्म लेने वाले बच्चों को वैधानिक दर्जा मिलेगा और उन्हें माता-पिता की संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त होंगे। इस व्यवस्था में महिला की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और पुरुष की 21 वर्ष निर्धारित की गई है।