मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय चुनावों में अब पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए बड़े बदलाव लागू कर दिए गए हैं। नए नियमों के तहत महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पद के प्रत्याशियों को नामांकन के साथ विस्तृत शपथ-पत्र देना अनिवार्य होगा। इसमें आपराधिक प्रकरण, संपत्ति, आय, टैक्स, कर्ज, निवेश और परिवार की आर्थिक स्थिति तक का खुलासा करना होगा। पर्चे में जानकारी छुपाने पर नामांकन सीधे रद्द कर दिया जाएगा। चुनावी नियमों में बड़ा संशोधन नए प्रावधानों के अनुसार अब नगरीय निकायों में भी वही प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जो आम चुनावों में होती है। उम्मीदवारों को पंजीकरण के समय विस्तृत शपथ-पत्र देना होगा, जिससे मतदाताओं को उनके बैकग्राउंड की पूरी तस्वीर मिल सके। यह नियम सभी आगामी उपचुनावों पर भी लागू होंगे। आपराधिक मामलों का पूरा विवरण जरूरी उम्मीदवार को अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होगी। खासकर वे मामले जिनमें दो साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, उनका थाना, एफआईआर नंबर और जिला स्पष्ट रूप से उल्लेखित करना होगा। जानकारी छिपाने पर नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।
‘पत्नी-टैक्स’ से आय तक हर जानकारी अनिवार्य शपथ-पत्र में उम्मीदवार को अपनी ही नहीं, बल्कि पत्नी/पति और तीन बच्चों की आय, टैक्स रिटर्न, कर्ज, संपत्ति और आय के स्रोतों का ब्योरा देना होगा। इसमें चल-अचल संपत्ति, निवेश, शेयर और संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्तियां भी शामिल रहेंगी। चुनावी खर्च पर नजर नगरीय विकास विभाग की सलाह के बाद प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा तय की जाएगी। उम्मीदवारों को पूरा खर्च चुनाव के बाद आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, ताकि आर्थिक पारदर्शिता बनी रहे। 2027 से पहले सभी चुनावों पर लागू होंगे नियम ये नए नियम वर्ष 2027 में होने वाले अधिकांश नगरीय निकाय चुनावों में लागू होंगे। इसके अलावा अगर मध्य अवधि में कोई उपचुनाव आयोजित होता है, तो वहां भी इन्हीं प्रावधानों का पालन किया जाएगा।