मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बहस तेज हो गई है। केंद्र के हालिया निर्देशों के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शिक्षण संस्थानों, मदरसों और सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंद गाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं, वहीं बयानबाजी ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है।
सीएम का निर्देश: सभी संस्थानों में अनिवार्य गायन
मुख्यमंत्री ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों का गायन शैक्षणिक संस्थानों, मदरसों और सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से कराया जाए। उनके अनुसार, यह स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। स्कूल शिक्षा विभाग को भी स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि यह व्यवस्था बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू की जाए।
मंत्री के बयान से बढ़ी सियासत
कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग के बयान ने विवाद को और हवा दे दी। उन्होंने कहा कि जो ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाना चाहता, उसे देश छोड़ देना चाहिए। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया।
विपक्ष का विरोध और अनुच्छेद 25 का हवाला
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने फैसले का विरोध करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और संविधान का अनुच्छेद 25 सभी नागरिकों को मजहबी आजादी का अधिकार देता है। उनका तर्क है कि ‘वंदे मातरम्’ की कुछ पंक्तियों को लेकर पहले भी आपत्तियां उठती रही हैं, इसलिए इस पर सर्वसम्मति जरूरी है।
आदेश का दायरा: स्कूल से मदरसा तक
स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि आदेश सभी प्रकार के शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा। इसमें सरकारी स्कूल, निजी स्कूल और मदरसे शामिल हैं। प्रशासनिक स्तर पर इसे लागू करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं, ताकि आगामी सरकारी कार्यक्रमों में इसका पालन सुनिश्चित किया जा सके।
सियासत बनाम संवैधानिक बहस
‘वंदे मातरम्’ को लेकर समय-समय पर देश के विभिन्न हिस्सों में बहस होती रही है। एक पक्ष इसे राष्ट्रभक्ति का प्रतीक मानता है, तो दूसरा पक्ष कुछ पंक्तियों को लेकर संवैधानिक अधिकारों की बात करता है। फिलहाल मध्यप्रदेश में यह मुद्दा राजनीतिक और संवैधानिक विमर्श का केंद्र बन गया है, जहां आगे सर्वदलीय चर्चा या कानूनी पहल की संभावना भी जताई जा रही है।