मध्य प्रदेश में अब ग्रामीण विकास की तस्वीर तेजी से बदलने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ी योजना का ऐलान करते हुए संकेत दिया है कि प्रदेश के हर गांव, मजरे और टोले को पक्की सड़कों से जोड़ा जाएगा। इस पहल से न सिर्फ गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर भी आसान होंगे। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से यह योजना और भी प्रभावी बनने जा रही है।
हर गांव तक पहुंचेगी सड़क सुविधा
प्रदेश सरकार ने सुगम संपर्कता परियोजना के तहत 7,135 नई सड़कों के निर्माण का लक्ष्य तय किया है। इन सड़कों के जरिए 100 से अधिक आबादी वाले सभी मजरे और टोले मुख्य मार्गों से जोड़े जाएंगे। इससे ग्रामीण इलाकों की पहुंच शहरों तक आसान होगी और लोगों को रोजमर्रा की सुविधाएं तेजी से मिल सकेंगी।
तकनीक से होगा विकास का ट्रैकिंग सिस्टम मजबूत
इस परियोजना की खास बात यह है कि सड़क निर्माण में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। ड्रोन के जरिए निर्माण कार्यों की निगरानी की जाएगी, वहीं ‘सिपरी’ सॉफ्टवेयर से सड़क और पुल-पुलियों की स्थिति पर नजर रखी जाएगी। इससे काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
1000 करोड़ का बजट, पंचायतों को भी अधिकार
सरकार इस परियोजना पर करीब 1000 करोड़ रुपए खर्च करेगी। खास बात यह है कि हर जनपद पंचायत को 3 करोड़ रुपए तक की स्वीकृति देने का अधिकार दिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने में तेजी आएगी और काम में देरी की संभावना कम होगी।
जियो-इंवेंट्री से डुप्लीकेशन पर रोक
प्रदेश में पहले से बनी सड़कों की जियो-इंवेंट्री तैयार की जा रही है, जिससे नई सड़कों के चयन में दोहराव नहीं होगा। अब तक 33,655 में से 17,437 सड़कों का डेटा तैयार हो चुका है। रतलाम, जबलपुर, आगर-मालवा, मंदसौर और पन्ना जैसे जिले इस काम में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
गांवों की जिंदगी में आएगा बड़ा बदलाव
इस योजना के लागू होने के बाद गांवों में रहने वाले लोगों की जिंदगी आसान हो जाएगी। बच्चों को स्कूल जाने में सुविधा मिलेगी, मरीज समय पर अस्पताल पहुंच सकेंगे और किसानों को अपनी उपज मंडियों तक ले जाने में कम परेशानी होगी। बरसात में खराब होने वाली कच्ची सड़कों की समस्या भी खत्म होगी।