मध्य प्रदेश सरकार अब गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। प्रदेश के 23 हजार गांवों के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। फिलहाल सीहोर और विदिशा की दो पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत हो चुकी है। इस योजना में रोजगार, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे बिंदुओं पर विशेष जोर रहेगा। यह प्रोजेक्ट दो चरणों में 2035 तक लागू किया जाएगा।
गांवों में शहरी विकास की झलक
मध्यप्रदेश में पहली बार ग्रामीण इलाकों के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। आमतौर पर शहरों के लिए जो प्लानिंग होती है, अब वैसा ही विजन गांवों के लिए भी अपनाया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य गांवों को आधुनिक बुनियादी सुविधाओं से लैस करना है ताकि ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी वहीं पर मिल सकें और पलायन रुके।
किस-किस पंचायत में शुरू हुआ प्रोजेक्ट?
इस योजना की शुरुआत सीहोर जिले की बिलकिसगंज पंचायत और विदिशा जिले की मुरवास पंचायत से हो चुकी है। यहां लेक फ्रंट डेवलपमेंट, नया बाजार, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, ग्रे वॉटर सिस्टम, प्लास्टिक वेस्ट कलेक्शन, नट उत्पादन, खेती और गौशाला जैसे विकास कार्यों की प्लानिंग तैयार है। भोपाल स्थित स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर द्वारा इन पंचायतों का डिजाइन तैयार किया गया है।
किन सुविधाओं पर रहेगा फोकस?
मास्टर प्लान के तहत गांवों को सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट, CCTV कैमरे, कचरा प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, हाउसिंग और एंटरटेनमेंट जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। हर गांव की भौगोलिक स्थिति के अनुसार सेक्टर मार्किंग भी की जाएगी। यह योजना 2026 से 2035 तक दो चरणों में पूरी की जाएगी।