मध्य प्रदेश में नवंबर की शुरुआत से ही कड़ाके की ठंड दस्तक दे चुकी है। उत्तर भारत में हो रही तेज बर्फबारी का असर अब सीधे एमपी के मौसम पर दिखने लगा है। उत्तरी हवाओं के कारण रात के तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए शीतलहर का अलर्ट जारी कर दिया है। कई जिलों में तापमान 8 से 10 डिग्री के बीच पहुंच गया है, जिससे ठिठुरन और बढ़ गई है।
उत्तर भारत की बर्फबारी का बड़ा असर
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार बर्फबारी हो रही है। वहां से आने वाली उत्तरी हवाएं असर दिखा रही हैं, जिससे मध्य प्रदेश में रात के तापमान में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य में नवंबर में इतनी ठंड का बढ़ना सामान्य से ज्यादा है और आने वाले दिनों में इसका असर और दिखाई दे सकता है।
अगले तीन दिन शीतलहर की चेतावनी
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि मध्य प्रदेश में अगले तीन दिन शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी। रविवार 16 नवंबर को भोपाल, इंदौर, जबलपुर, शहडोल, छतरपुर, राजगढ़, शिवपुरी, शाजापुर, सीहोर, सतना, निवाड़ी, देवास, टीकमगढ़, पन्ना, रीवा, मैहर, डिंडोरी, कटनी, अनूपपुर और उमरिया में शीतलहर का अलर्ट जारी है। इन जिलों में सुबह-शाम ठंड का असर काफी अधिक रहेगा।
कई शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे
प्रदेश के अलग-अलग शहरों में शुक्रवार-शनिवार की रात तापमान तेजी से गिरा। रीवा में 7.5, नौगांव में 7.8, भोपाल में 8, उमरिया में 8.4, शिवपुरी में 9, खजुराहो में 9.4, इंदौर में 9.6, सतना और मलाजखंड में 9.6, जबलपुर में 9.7, छिंदवाड़ा में 9.8 और ग्वालियर में 9.9 डिग्री दर्ज किया गया। बाकी शहरों में भी पारा 10 डिग्री के आसपास रहा, जो नवंबर के हिसाब से काफी कम है।
लोगों को बढ़ानी होगी सावधानी
तेज ठंड के बीच विशेषज्ञों ने लोगों को रात और सुबह बाहर निकलते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। तापमान में तीखी गिरावट खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को अधिक प्रभावित कर सकती है। सुबह की ओस और हवा की नमी से ठंड का असर और तेज होने की संभावना है, इसलिए गर्म कपड़ों और हीटर का इस्तेमाल जरूरी बताया गया है।
किसानों पर भी दिखेगा असर
तेज ठंड का असर खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है। शीतलहर से कुछ इलाकों में फसलों में हल्की नमी और पाले की स्थिति बन सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मौसम के अनुसार सिंचाई और संरक्षण उपाय अपनाने की सलाह दी है, ताकि रबी फसलों पर किसी तरह का विपरीत असर न पड़े।