MP WEATHER ALERT: मध्यप्रदेश में मानसून सक्रिय है, लेकिन बारिश का वितरण एक जैसा नहीं है। प्रदेश के कई जिलों में अब भी सामान्य बारिश का इंतजार बना हुआ है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अब तक सीजन की कुल औसत बारिश का करीब 88% हिस्सा ही पूरा हो पाया है। यानी प्रदेश में सामान्य से लगभग 13% कम बारिश दर्ज हुई है। खास बात यह है कि एक ओर कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ राजधानी भोपाल में सितंबर की बारिश ने पिछले चार साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
37 जिलों में अब भी बारिश का कोटा अधूरा
प्रदेश के 37 जिलों में बारिश का कोटा अभी पूरा नहीं हुआ है। पश्चिमी मध्यप्रदेश की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है। इंदौर, उज्जैन और जबलपुर संभाग के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 32 जिलों में बारिश सामान्य से 2% से 49% तक कम रही है।
पूर्वी MP में बारिश का प्रदर्शन बेहतर
पश्चिमी हिस्से के मुकाबले पूर्वी मध्यप्रदेश में मानसून का असर बेहतर रहा है। निवाड़ी में सामान्य से 49% अधिक, जबकि मऊगंज में 44% ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
भोपाल में चार साल बाद रिकॉर्ड
बारिश की कमी के बीच राजधानी भोपाल में मानसून ने अलग तस्वीर दिखाई है। सितंबर में अब तक 7 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। चार साल बाद सितंबर में इतनी रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई है।
अगले चार दिन अति भारी बारिश नहीं
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 15 से 17 सितंबर के दौरान कई जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ सकती हैं। हालांकि अगले चार दिनों में प्रदेश के किसी भी हिस्से में अति भारी बारिश का अनुमान नहीं है।
मानसून का असमान वितरण चिंता का विषय
प्रदेश में बारिश का यह असमान वितरण तस्वीर को दिलचस्प बना रहा है। जहां कुछ जिलों में बारिश की कमी बनी हुई है, वहीं कुछ इलाकों में सामान्य से काफी ज्यादा पानी बरसा है।