मध्य प्रदेश में अब जन्म प्रमाण पत्र बनवाना आसान और तेज होने जा रहा है। राज्य सरकार एक ऐसे डिजिटल मॉडल की तैयारी में है, जिसके तहत नवजात शिशु का जन्म प्रमाण पत्र महज 7 दिनों के भीतर सीधे व्हाट्सएप पर उपलब्ध कराया जाएगा। इस नई व्यवस्था से अस्पतालों के चक्कर और लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी। भोपाल में सफल ट्रायल के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना है।
प्रदेशभर में लागू होगा डिजिटल सिस्टम
मध्य प्रदेश सरकार इस नई सुविधा को पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी कर रही है। अभी यह व्यवस्था भोपाल के हमीदिया अस्पताल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित हो रही है, जहां इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। इसी सफलता के आधार पर अब इसे सभी जिलों के सरकारी और निजी अस्पतालों तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है।
WhatsApp पर सीधे मिलेगा सर्टिफिकेट
नई व्यवस्था के तहत जन्म के बाद बच्चे का रजिस्ट्रेशन डिजिटल माध्यम से किया जाएगा और 7 दिनों के भीतर जन्म प्रमाण पत्र संबंधित मोबाइल नंबर के व्हाट्सएप पर भेज दिया जाएगा। इससे अभिभावकों को किसी कार्यालय या अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
समय और प्रक्रिया दोनों होंगे आसान
अब तक जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई बार अस्पताल जाना और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। इस डिजिटल मॉडल से पूरी प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी बन जाएगी। ऑनलाइन सिस्टम के कारण देरी और त्रुटियों की संभावना भी कम होगी।
नवजात के माता-पिता को बड़ी राहत
यह पहल खासकर नवजात शिशुओं के माता-पिता के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी। पहले जहां प्रमाण पत्र के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब यह दस्तावेज घर बैठे ही मिल जाएगा। इससे समय, ऊर्जा और संसाधनों की बचत होगी।
डिजिटल इंडिया की दिशा में अहम कदम
सरकार का मानना है कि यह पहल डिजिटल इंडिया को मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल सरकारी सेवाएं आधुनिक होंगी, बल्कि आम नागरिकों को भी तकनीक के माध्यम से तेज और सुविधाजनक सेवाएं मिल सकेंगी। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य सेवाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।