मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर नई योजनाओं पर काम शुरू किया जा रहा है। चीतों के बाद अब राज्य में जंगली कुत्तों को बसाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आंध्र प्रदेश से जंगली कुत्ते लाए जाएंगे, जबकि बदले में मध्यप्रदेश बाघ और गौर उपलब्ध कराएगा। वन विभाग की समीक्षा बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
जंगली कुत्तों और सोन चिरैया पर फोकस
वन विभाग की योजना के तहत आंध्र प्रदेश से जंगली कुत्तों को लाकर मध्यप्रदेश में बसाया जाएगा। इसके अलावा राजस्थान से सोन चिरैया लाकर घाटीगांव और गांधी सागर क्षेत्र में छोड़े जाने की तैयारी है। वहीं पालपुर कूनो से दो और चीतों को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित किया जाएगा।
वन्यजीव सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था
वन्यजीवों की निगरानी और अपराधों पर नियंत्रण के लिए राज्य स्तरीय टॉस्क फोर्स बनाई जाएगी। साथ ही कमांड एंड कंट्रोल रूम की स्थापना की जाएगी। कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और पन्ना जैसे प्रमुख नेशनल पार्कों के पास वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर भी तैयार किए जाएंगे।
जंगली हाथियों के प्रबंधन पर जोर
राज्य में जंगली हाथियों के बेहतर प्रबंधन के लिए महावतों के पद बढ़ाने की तैयारी की गई है। अधिकारियों के एक दल को प्रशिक्षण के लिए पश्चिम बंगाल भेजा गया है ताकि हाथियों के व्यवहार और प्रबंधन को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
जंगलों में बीमारी और भूमि विवाद पर चर्चा
बैठक में अनूपपुर और डिंडौरी के जंगलों में साल बोरर आपदा का भी जिक्र हुआ। अधिकारियों ने बताया कि यह समस्या कई वर्षों बाद सामने आई है। इसके अलावा वन और राजस्व विभाग से जुड़े भूमि विवादों को खत्म करने के लिए भी नए कदम उठाने की तैयारी है।
तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलेगा बोनस
वन विभाग के अनुसार इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले लोगों को 710.71 करोड़ रुपये की बोनस राशि दी जाएगी, जिससे बड़ी संख्या में जुड़े परिवारों को लाभ मिलेगा।