मध्य प्रदेश विधानसभा नए साल में तकनीक के नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। अब सदन की कार्यवाही कागज़ों के ढेर से नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित होगी। बजट सत्र से ई-विधान व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसके तहत विधायक पूरी तरह पेपरलेस कामकाज करेंगे। इसके लिए विधायकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि विधानसभा की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, तेज और आधुनिक बन सके।
विधायकों को मिलेगा पेपरलेस वर्किंग का प्रशिक्षण
मध्य प्रदेश विधानसभा को डिजिटल बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम प्रशिक्षण कार्यक्रम है। मंगलवार से विधायकों के लिए ई-विधान से जुड़ी ट्रेनिंग शुरू हो रही है। इस प्रशिक्षण में संसदीय कार्य मंत्रालय से जुड़े अनुभवी अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ विधायकों को डिजिटल सिस्टम के उपयोग की जानकारी देंगे। टैबलेट, ऑनलाइन दस्तावेज़, डिजिटल प्रश्नोत्तर और ई-नोटिस जैसे पहलुओं पर विशेष फोकस रहेगा।
बजट सत्र से लागू होगा ई-विधान
विधानसभा का आगामी बजट सत्र पूरी तरह से ई-विधान प्रणाली पर आधारित होगा। इसका मतलब है कि विधेयक, प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, रिपोर्ट और कार्यसूची डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगी। सदन में कागज़ों का इस्तेमाल लगभग खत्म हो जाएगा, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी। साथ ही सदन की कार्यवाही अधिक सुव्यवस्थित और सुचारु तरीके से आगे बढ़ेगी।
क्या है नेशनल ई-विधान परियोजना (NEVA)?
नेशनल ई-विधान परियोजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण ई-गवर्नेंस पहल है। इसका उद्देश्य देश की सभी विधानसभाओं और विधान परिषदों को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना है। “एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन” के सिद्धांत पर बनी यह योजना डिजिटल इंडिया अभियान का हिस्सा है। इसके जरिए विधायी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता को बढ़ावा मिलता है।
देशभर में तेजी से लागू हो रही योजना
अब तक देश के 23 राज्यों के 25 सदनों ने ई-विधान परियोजना को लागू करने के लिए समझौता किया है। इनमें से 14 से अधिक राज्यों में यह व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू भी हो चुकी है। मध्य प्रदेश का इस सूची में शामिल होना राज्य को तकनीकी रूप से सशक्त और प्रशासनिक रूप से आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
पर्यावरण और प्रशासन दोनों को लाभ
ई-विधान प्रणाली से न सिर्फ कागज़ की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा। साथ ही दस्तावेज़ों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, जिसे कभी भी और कहीं से एक्सेस किया जा सकेगा। इससे विधायकों के साथ-साथ विधानसभा सचिवालय के कामकाज में भी तेजी आएगी।