मध्य प्रदेश की राजनीति और विकास की दिशा तय करने वाला विधानसभा का बजट सत्र 2026 इस बार खास होने जा रहा है। 16 फरवरी से शुरू होकर 6 मार्च तक चलने वाले इस सत्र में सरकार अपने कामकाज का लेखा-जोखा पेश करेगी, जबकि विपक्ष सवालों की धार तेज करेगा। 19 दिनों के भीतर 12 बैठकों में बजट से लेकर अहम विधेयकों तक पर चर्चा होगी।
16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा बजट सत्र
मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने बजट सत्र 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके अनुसार सत्र की शुरुआत 16 फरवरी 2026 को होगी और समापन 6 मार्च 2026 को किया जाएगा। कुल 19 दिनों की अवधि में 12 बैठकें प्रस्तावित की गई हैं। इन बैठकों के दौरान सदन में वित्तीय कार्यों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी।
वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट होगा पेश
इस बजट सत्र का सबसे अहम पड़ाव राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाना है। माना जा रहा है कि बजट में कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर विशेष जोर रहेगा। पिछले वर्ष 2025-26 के बजट में 4.21 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, ऐसे में इस बार बजट का आकार और घोषणाएं दोनों बढ़ने की संभावना है।
12 बैठकों में होंगे अहम विधेयक और चर्चाएं
हालांकि सत्र की अवधि 19 दिन की है, लेकिन इसमें कुल 12 कार्यदिवस तय किए गए हैं। शेष दिनों में अवकाश रह सकते हैं। इन 12 बैठकों में बजट प्रस्तुति, अनुदान मांगों पर चर्चा, प्रश्नकाल और विधायी कार्य संपन्न होंगे। सरकार की नीतियों और योजनाओं पर सदन में गहन बहस होने के संकेत हैं।
विपक्ष के सवालों से गर्माएगा सदन
यह बजट सत्र मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। बजट के जरिए सरकार अपने विकास एजेंडे को मजबूती से पेश करेगी, वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की स्थिति और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर सकता है। ऐसे में सदन के भीतर सियासी तापमान बढ़ना तय माना जा रहा है।
बजट के बाद अनुदान मांगों पर लंबी बहस
बजट पेश होने के बाद विभागवार अनुदान मांगों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसमें हर विभाग के खर्च, योजनाओं और भविष्य की रणनीति पर सवाल-जवाब होंगे। यह प्रक्रिया सरकार के कामकाज की पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।