मध्य प्रदेश की जेलों से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां दो अलग-अलग केंद्रीय जेलों में बंद कैदियों ने आत्महत्या कर ली। एक मामला भोपाल सेंट्रल जेल का है, जबकि दूसरा जबलपुर की नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल से जुड़ा है। दोनों घटनाओं ने जेल सुरक्षा, निगरानी और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन आत्महत्या के पीछे के कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं।
भोपाल सेंट्रल जेल: गौशाला में फांसी पर झूला बंदी
भोपाल केंद्रीय जेल में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक बंदी ने आत्महत्या कर ली। जानकारी के अनुसार, बंदी जेल परिसर में स्थित गौशाला में काम करता था। उसने पेड़ पर रस्सी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। मृतक की पहचान गुड्डू आदिवासी, निवासी रायसेन के रूप में हुई है। वह वर्ष 2017 से हत्या के मामले में सजा काट रहा था। घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाकर मर्ग कायम कर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है।
जबलपुर सेंट्रल जेल: शौचालय में तौलिये से लगाया फंदा
दूसरी घटना जबलपुर की नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल की है, जहां एक विचाराधीन बंदी ने आत्महत्या कर ली। बंदी ने अस्पताल वार्ड के शौचालय में तौलिये का फंदा बनाकर अपनी जान दे दी। मृतक की पहचान गुड्डू उर्फ राजा विश्वकर्मा के रूप में हुई है, जो संजीवनी नगर का रहने वाला था। उसे विभिन्न धाराओं के तहत अगस्त 2024 में जेल भेजा गया था। बताया जा रहा है कि वह शुगर समेत अन्य बीमारियों से भी पीड़ित था।
जेल प्रशासन और पुलिस की जांच शुरू
दोनों मामलों में जेल प्रशासन ने तुरंत संबंधित थानों को सूचना दी। जबलपुर में सिविल लाइन थाना पुलिस और अन्य अधिकारी जांच में जुटे हैं, जबकि भोपाल में भी गांधीनगर थाना पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। प्रारंभिक जांच में किसी सुसाइड नोट की जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे कारणों का पता लगाना चुनौती बना हुआ है।
मानसिक स्वास्थ्य और निगरानी पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं जेलों में बंद कैदियों की मानसिक स्थिति और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक कैद, बीमारी और मानसिक तनाव ऐसे कदम उठाने के पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं। हालांकि, इन दोनों मामलों में असली वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।