मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी और आदर्श कही जाने वाली गौशाला से सामने आई तस्वीरों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्वालियर स्थित इस गौशाला में एक साथ 15 गोवंशों की मौत ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। करोड़ों रुपये के सालाना खर्च के बावजूद हालात ऐसे हैं कि गौवंशों की जान नहीं बच पा रही, जो संवेदनाओं को झकझोरने वाला मामला है।
एक के ऊपर एक पड़े मिले शव, मचा हड़कंप
ग्वालियर के लाल टिपारा क्षेत्र में स्थित आदर्श गौशाला में उस समय हड़कंप मच गया, जब परिसर के भीतर 15 गोवंशों के शव बेहद खराब अवस्था में मिले। कई शव एक-दूसरे के ऊपर पड़े नजर आए, जिससे साफ है कि समय पर न तो इलाज मिला और न ही उचित निगरानी रखी गई। यह गौशाला नगर निगम द्वारा संचालित की जाती है और इसे प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला माना जाता है।
हर साल 25 करोड़ खर्च, फिर भी बदहाल हालात
चौंकाने वाली बात यह है कि इस गौशाला में गोवंशों की देखभाल पर हर साल करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। यहां 10 हजार से अधिक गोवंश रखे गए हैं। इतने बड़े बजट और संसाधनों के बावजूद एक साथ 15 मौतें होना व्यवस्था की गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
नगर निगम आयुक्त ने दिए जांच के आदेश
मामला सामने आते ही नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मौत के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।
प्रशासन का पक्ष: स्वस्थ गोवंश की मौत नहीं
गौशाला निरीक्षण के बाद कलेक्टर रुचिका चौहान ने बयान दिया कि यहां बीमार और सड़क दुर्घटना में घायल गोवंश लाए जाते हैं, जिनकी हालत गंभीर होने के कारण मृत्यु हो जाती है। उनके अनुसार किसी भी स्वस्थ गोवंश की मौत नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ अतिरिक्त व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की जरूरत है।
उठते सवाल: जवाबदेही तय होगी या नहीं?
यह घटना केवल एक गौशाला की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। जब करोड़ों का बजट, हजारों गोवंश और प्रशासनिक निगरानी मौजूद है, तब ऐसी मौतें कैसे हो रही हैं? अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में जवाबदेही तय की जाती है।