मध्य प्रदेश में 5.72 लाख से अधिक वोटरों पर पहचान संकट मंडरा रहा है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान साल 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान वोटरों की तुलना की जाएगी। जिनके माता-पिता के नाम उस सूची में दर्ज नहीं थे, उनकी पात्रता और पहचान दस्तावेजों से सत्यापित की जाएगी। बीएलओ जल्द ही घर-घर जाकर फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
क्या है SIR प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए SIR की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत 2003 की वोटर लिस्ट को आधार माना गया है। जिन लोगों के नाम उस समय सूची में नहीं थे, उन्हें अब अपने दस्तावेजों के जरिए यह साबित करना होगा कि वे पात्र मतदाता हैं। बीएलओ घर-घर जाकर Enumeration Form देंगे, जिसे हर व्यक्ति को भरना होगा।
कौन से दस्तावेज होंगे जरूरी
वोटर की पहचान के लिए पासपोर्ट, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, बैंक या एलआईसी के पुराने दस्तावेज, जन्म प्रमाण पत्र और भूमि या मकान से संबंधित कागजात मान्य माने जाएंगे। शर्त यह है कि ये दस्तावेज 1 जुलाई 1987 से पहले के होने चाहिए।
कहां सबसे ज्यादा प्रभाव
रीवा शहर में मतदाताओं की संख्या 11,239 घटी है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में नए वोटरों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। त्योंथर, मनगवां, गुढ़, सिरमौर, मऊगंज और देवतालाब में लाखों नए मतदाता जुड़े हैं। यह अभियान आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाने का बड़ा कदम माना जा रहा है।