अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर उड़ रहा अमेरिका का अत्याधुनिक MQ-4C ट्राइटन ड्रोन अचानक लापता हो गया। 1600 करोड़ की कीमत वाला यह ड्रोन केवल तकनीक नहीं, बल्कि रणनीतिक ताकत का प्रतीक था—और इसका यूं गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
उड़ान के बीच आया ‘खतरे का संकेत’
ड्रोन अपनी निगरानी मिशन पूरा कर बेस की ओर लौट रहा था, तभी उसने अचानक इमरजेंसी कोड 7700 भेजा। यह कोड आमतौर पर किसी गंभीर तकनीकी गड़बड़ी या खतरे का संकेत होता है। इसके तुरंत बाद ड्रोन ने दिशा बदली और ईरान की ओर हल्का झुकाव दिखाया। फिर तेजी से ऊंचाई कम करते हुए वह रडार से गायब हो गया—यहीं से रहस्य शुरू होता है।
तकनीकी खराबी या टारगेटेड हमला?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह महज दुर्घटना थी या किसी ने इसे निशाना बनाया? जिस क्षेत्र में यह घटना हुई, वह पहले से ही सैन्य गतिविधियों और निगरानी का केंद्र रहा है। ऐसे में यह संभावना भी जताई जा रही है कि ड्रोन को साइबर तरीके से हैक किया गया हो या फिर किसी एडवांस मिसाइल सिस्टम से मार गिराया गया हो।
MQ-4C ट्राइटन: ‘आंख’ जो सब देखती है
यह ड्रोन अमेरिका की निगरानी क्षमता का अहम हिस्सा माना जाता है। 50,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ान, 24 घंटे तक लगातार निगरानी और हजारों किलोमीटर की रेंज इसे बेहद खतरनाक और प्रभावशाली बनाती है। यह समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है और अक्सर अन्य गश्ती विमानों के साथ मिलकर काम करता है।
सीजफायर के बीच बढ़ा शक
घटना ऐसे समय हुई है जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम हुआ है। ऐसे में इस ड्रोन का अचानक गायब होना किसी बड़े संदेश या ‘पावर गेम’ की ओर इशारा कर सकता है। क्या यह किसी देश की चेतावनी है या फिर किसी छुपे ऑपरेशन का हिस्सा—यह अभी साफ नहीं है, लेकिन टाइमिंग ने संदेह जरूर बढ़ा दिया है।
हर सेकंड करोड़ों का खेल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका का सैन्य खर्च भी चर्चा में है। युद्ध और निगरानी अभियानों में हर सेकंड लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। मिसाइल डिफेंस सिस्टम, हवाई ऑपरेशन और समुद्री गतिविधियों पर रोजाना हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे में एक महंगे ड्रोन का यूं गायब होना सिर्फ सुरक्षा नहीं, आर्थिक झटका भी है।