AIIMS Health: MRI to Heart Surgery---स्वास्थ्य सेवाओं में जांच और सर्जरी के लिए मरीजों को कई बार लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। सामान्य ब्लड और यूरिन टेस्ट जल्दी हो जाते हैं, लेकिन CT Scan, Ultrasound और खासकर MRI जैसी जांचों के लिए उपलब्ध स्लॉट के हिसाब से काफी आगे की तारीख मिल सकती है। वहीं, नॉन-इमरजेंसी हार्ट और ब्रेन सर्जरी के मामलों में यह इंतजार और लंबा होने की संभावना रहती है।
रूटीन जांच में कम समय, स्कैन के लिए बढ़ सकता है इंतजार
संवाद: डॉक्टर से परामर्श के बाद मरीजों को कुछ सामान्य जांचों के लिए ज्यादा समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता। ब्लड और यूरिन टेस्ट जैसी रूटीन जांच कई मामलों में उसी दिन या अगले दिन पूरी हो सकती हैं। हालांकि, जब मरीज को CT Scan या Ultrasound की जरूरत होती है, तो उपलब्धता के आधार पर जांच की तारीख आगे मिल सकती है। कुछ परिस्थितियों में इन जांचों के लिए 1 से 3 महीने बाद का स्लॉट मिलने की संभावना बताई गई है।
MRI के लिए कई महीनों तक करना पड़ सकता है इंतजार
MRI Scan की मांग अधिक होने के कारण इसकी वेटिंग अवधि सामान्य जांचों की तुलना में काफी लंबी हो सकती है। मरीज की जरूरत और उपलब्ध मशीन या स्लॉट के आधार पर अपॉइंटमेंट कई महीने आगे जा सकती है। कुछ मामलों में MRI जांच के लिए मरीजों को 6 महीने से लेकर 1 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में जांच की आवश्यकता वाले मरीजों के लिए समय पर अपॉइंटमेंट मिलना एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।
हार्ट और ब्रेन सर्जरी में वेटिंग सबसे ज्यादा
जब बात गंभीर और विशेषज्ञता वाली सर्जरी की आती है, तो इंतजार की अवधि और बढ़ सकती है। कार्डियोथोरेसिक सर्जरी और न्यूरो सर्जरी जैसे विभागों में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण पहले से निर्धारित नॉन-इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए लंबी वेटिंग हो सकती है। इन विभागों में इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ-साथ ऑपरेशन की सुविधा और उपलब्ध समय भी अहम भूमिका निभाता है।
नॉन-इमरजेंसी सर्जरी के लिए 2 साल तक की वेटिंग संभव
दिल या दिमाग की सर्जरी की जरूरत वाले मरीजों में यदि मामला तत्काल ऑपरेशन की श्रेणी में नहीं आता है, तो कुछ मामलों में इंतजार की अवधि 2 साल तक पहुंच सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर मरीज को इतनी लंबी प्रतीक्षा करनी होगी। बीमारी की गंभीरता, मरीज की मेडिकल प्राथमिकता, ऑपरेटिंग स्लॉट की उपलब्धता और मरीज की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर सर्जरी की तारीख तय होती है।
मरीज की हालत तय करती है इलाज की प्राथमिकता
जांच या सर्जरी के लिए वेटिंग टाइम एक जैसा नहीं होता। इमरजेंसी मामलों को सामान्यतः मेडिकल प्राथमिकता के आधार पर पहले लिया जा सकता है, जबकि नॉन-इमरजेंसी मामलों में उपलब्ध स्लॉट के अनुसार तारीख दी जाती है। इसलिए किसी मरीज को जांच या सर्जरी के लिए कितना इंतजार करना पड़ेगा, यह उसकी बीमारी और मेडिकल जरूरत के साथ उपलब्ध संसाधनों पर भी निर्भर करता है। खासतौर पर MRI, हार्ट सर्जरी और ब्रेन सर्जरी जैसे मामलों में मरीज की स्थिति के अनुसार प्राथमिकता तय होना महत्वपूर्ण है