Mukhtar Ansari son Abbas. : गैंगस्टर से नेता बने दिवंगत मुख्तार अंसारी के बेटे मऊ सदर विधायक अब्बास अंसारी को शनिवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की एक स्थानीय अदालत ने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान दर्ज किए गए भड़काऊ भाषण के मामले में दोषी ठहराया. उन्हें दो साल जेल की सजा सुनाई गई है, जिसके परिणामस्वरूप उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त होने की संभावना है. विवादित भाषण के दौरान मंच पर मौजूद अब्बास के चुनाव एजेंट मंसूर अंसारी को भी मामले में दोषी ठहराया गया और छह महीने जेल की सजा सुनाई गई. इस बीच, अब्बास के छोटे भाई उमर अंसारी, जो जनसभा स्थल पर भी मौजूद थे, को अदालत ने बरी कर दिया.
इतना लगाया गया जुर्माना
अब्बास अंसारी के वकील दरोगा सिंह के अनुसार, अब्बास और मंसूर दोनों ने 20-20 हजार रुपये के जमानत बांड जमा किए और उन्हें जमानत मिल गई. अंसारी पर एक चुनावी भाषण देने के बाद मामला दर्ज किया गया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर राज्य सरकार के अधिकारियों को समाजवादी पार्टी की सरकार आने पर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी. यह भाषण 2022 के विधानसभा चुनावों के प्रचार के दौरान दिया गया था, जब ओपी राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में थी और उसे चुनाव लड़ने के लिए मऊ सीट आवंटित की गई थी. हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव के दबाव में, एसबीएसपी ने मऊ सदर से अपने चुनाव चिन्ह पर सपा उम्मीदवार अब्बास अंसारी को मैदान में उतारा.
क्या बोला अंसारी
रैली को संबोधित करते हुए अंसारी ने कहा "मैंने अखिलेश जी से कहा है कि सरकार बनने के बाद छह महीने तक नौकरशाहों का कोई तबादला या पोस्टिंग नहीं होगी. सभी वहीं रहेंगे जहां हैं. पहले हिसाब-किताब होगा, उसके बाद ही तबादले होंगे. इसके बाद उन पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए: 506 (आपराधिक धमकी), 171एफ (चुनाव में अनुचित प्रभाव या व्यक्तित्व का इस्तेमाल), 186 (सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में सरकारी कर्मचारी को बाधा पहुंचाना), 189 (सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाने की धमकी), 153ए धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और 120बी आपराधिक साजिश.
सदस्यता भी खत्म
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार, दो साल या उससे अधिक कारावास की सजा पाने वाले किसी भी विधायक की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है. विधानसभा सचिवालय के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने बताया, "अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त होने पर विधानसभा सचिवालय संबंधित सीट को रिक्त घोषित कर देता है और इसकी सूचना राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेज देता है, जो रिक्त सीट पर उपचुनाव कराने के लिए भारत के चुनाव आयोग को प्रस्ताव भेजता है. हालांकि अब्बास अंसारी के पास इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का विकल्प है. यदि उच्च न्यायालय मऊ न्यायालय के आदेश पर रोक लगाता है, तो अयोग्यता की कार्यवाही भी रुक जाएगी.