रणजी ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल से पहले मुंबई के चयनकर्ताओं ने बड़ा कदम उठाया है। कर्नाटक के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले के लिए मुंबई ने अपनी 16 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। इस टीम में दो बड़े नामों की वापसी हुई है, जिन पर पूरे मैच का दारोमदार रहने वाला है। यह मुकाबला 6 से 9 फरवरी तक बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित एमसीए मैदान पर खेला जाएगा। नॉकआउट मैच होने के कारण हार का मतलब सीधे टूर्नामेंट से बाहर होना है, ऐसे में एक भी चूक मुंबई को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
शार्दुल ठाकुर की कप्तान के रूप में वापसी
चोट से उबरने के बाद शार्दुल ठाकुर की टीम में वापसी हुई है और उन्हें कप्तानी भी सौंपी गई है। शार्दुल लंबे समय से चोट के कारण बाहर चल रहे थे, जिससे मुंबई की गेंदबाजी कमजोर नजर आ रही थी। उनकी वापसी से तेज गेंदबाजी के साथ-साथ निचले क्रम की बल्लेबाजी भी मजबूत होगी। अगर शार्दुल फिट रहते हुए पूरा मैच खेलते हैं, तो मुंबई को संतुलन मिलेगा, वरना कप्तान की गैरमौजूदगी टीम को नुकसान पहुंचा सकती है।
यशस्वी जायसवाल की वापसी पर टिकी नजरें
टीम में सबसे ज्यादा चर्चा यशस्वी जायसवाल की वापसी को लेकर है। वह पिछले मुकाबलों में टीम का हिस्सा नहीं थे, जिसको लेकर मुंबई क्रिकेट संघ की नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। कहा जा रहा था कि वह अपनी मर्जी से मैच नहीं खेल रहे हैं। हालांकि दूसरी ओर यह भी सामने आया कि उनकी तबीयत खराब थी और डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी थी। अब उनकी वापसी से चयनकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि टीम को इस बड़े मैच में उनका साथ चाहिए।
कम मैच लेकिन दमदार प्रदर्शन
मौजूदा रणजी ट्रॉफी सत्र में जायसवाल ने सिर्फ एक ही मुकाबला खेला है, लेकिन उसी में उन्होंने 223 रन ठोक दिए थे। उस मैच में पहली पारी में शतक और दूसरी पारी में अर्धशतक लगाकर उन्होंने अपनी क्लास दिखा दी थी। क्वार्टर फाइनल जैसे दबाव वाले मुकाबले में उनसे इसी तरह के बड़े प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। अगर वह जल्दी आउट हो जाते हैं, तो मुंबई की बल्लेबाजी कमजोर पड़ सकती है और इसका सीधा नुकसान टीम को होगा।
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टीम का संतुलन और बाकी खिलाड़ी
मुंबई की टीम में सरफराज खान, सिद्धेश लाड, शम्स मुलानी और तनुष कोटियान जैसे भरोसेमंद खिलाड़ी शामिल हैं। विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी हार्दिक तामोरे के पास होगी, जबकि तेज गेंदबाजी का जिम्मा तुषार देशपांडे और मोहित अवस्थी संभालेंगे। टीम संतुलित जरूर दिख रही है, लेकिन नॉकआउट मैच में दबाव हमेशा गलतियों की वजह बनता है। एक खराब सत्र पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है।
हार का मतलब सीधा बाहर होना
रणजी ट्रॉफी का क्वार्टर फाइनल ऐसा मुकाबला है, जहां दूसरा मौका नहीं मिलता। कर्नाटक जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अगर मुंबई चूकी, तो खिताब की दौड़ यहीं खत्म हो जाएगी। ऐसे में जायसवाल और शार्दुल जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। अब देखना यह है कि ये दोनों वापसी को यादगार बनाते हैं या फिर एक चूक मुंबई को भारी नुकसान में डाल देती है।