मुंबई की सियासत में एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। बृहन्मुंबई नगर निगम के मेयर पद को लेकर गठबंधन के भीतर खींचतान तेज हो गई है। शिवसेना ने मेयर पद के लिए नया प्रस्ताव रखते हुए इसे पहले एक साल के लिए अपने पास देने की मांग की है, वहीं भाजपा ने संभावित सियासी उठापटक को देखते हुए अपने पार्षदों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।
बीएमसी मेयर पद पर सस्पेंस बरकरार
महानगरपालिका चुनाव में भारी जीत के बाद भी बीएमसी के मेयर पद को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है। गठबंधन को बहुमत मिलने के बावजूद यह तय नहीं हो सका है कि मुंबई का अगला मेयर किस पार्टी से होगा। इसी बीच अंदरूनी बातचीत और रणनीतिक बैठकों का दौर तेज हो गया है, जिससे राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है।
शिवसेना की नई डिमांड ने बढ़ाई हलचल
सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना ने मेयर पद को लेकर नया फॉर्मूला सामने रखा है। पार्टी चाहती है कि पहले एक साल के लिए मेयर पद शिवसेना को दिया जाए। पहले शिवसेना ढाई-ढाई साल के कार्यकाल की मांग कर रही थी, लेकिन सहमति बनती न देख अब उसने एक साल का प्रस्ताव रखा है, जिसने गठबंधन के भीतर नई बहस छेड़ दी है।
बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी का हवाला
शिवसेना अपनी मांग के समर्थन में भावनात्मक और राजनीतिक तर्क दे रही है। पार्टी का कहना है कि 23 जनवरी को बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी है और इस ऐतिहासिक मौके पर मुंबई के मेयर पद पर शिवसेना का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। इसे बाल ठाकरे को श्रद्धांजलि के तौर पर देखा जा रहा है, जिसे पार्टी अपने कोर समर्थकों के लिए अहम मान रही है।
गठबंधन धर्म की दी जा रही दलील
शिवसेना यह भी तर्क दे रही है कि केंद्र और राज्य में कठिन राजनीतिक हालात में उसने हमेशा गठबंधन का साथ निभाया है। ऐसे में गठबंधन धर्म के तहत पहले साल शिवसेना को मेयर पद दिया जाए, जबकि शेष चार साल भाजपा मेयर पद संभाले। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।
भाजपा ने पार्षदों को किया अलर्ट
मेयर चुनाव को लेकर भाजपा भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। पार्टी ने अपने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को अगले 10 दिनों तक मुंबई से बाहर न जाने का निर्देश दिया है। जरूरत पड़ने पर पार्टी नेतृत्व को सूचना देने को कहा गया है। दरअसल, मेयर चुनाव में बहुमत का आंकड़ा बेहद नाजुक है और गठबंधन के पास सिर्फ कुछ वोटों की बढ़त है, ऐसे में किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए यह रणनीति अपनाई गई है।