बुलंदशहर, शिकारपुर पानी के मामूली विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया था, जिसका अंजाम एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या और दूसरे के गंभीर घायल होने के रूप में सामने आया। इस सनसनीखेज मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है.
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता प्रवीण कुमार राणा ने जानकारी देते हुए बताया कि 20 जुलाई 2015 को कोतवाली शिकारपुर क्षेत्र के गांव तैयबपुर निवासी नेपाल पुत्र राजपाल सिंह ने अपने भाई तेजवीर सिंह की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तहरीर के अनुसार पानी को लेकर तेजवीर सिंह का गांव के ही नरेंद्र सिंह उर्फ पप्पू तथा उसके पुत्र सुमित और अतुल से विवाद हो गया था।
विवाद के चलते दोपहर के समय आरोपी नरेंद्र सिंह ने अपने पुत्रों के साथ मिलकर लाइसेंसी दुनाली बंदूक से तेजवीर सिंह और उनके पुत्र राजू पर फायरिंग कर दी। इस हमले में तेजवीर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनका पुत्र राजू गंभीर रूप से घायल हो गया.
पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की, आरोपियों को गिरफ्तार किया और चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की। अभियोजन पक्ष की ओर से 6 गवाहों को न्यायालय में पेश किया गया।
मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (द्वादश) गोपाल जी की अदालत में हुई। गवाहों के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने नरेंद्र सिंह उर्फ पप्पू और उसके पुत्र सुमित को दोषी करार दिया.
न्यायालय ने दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर 30-30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. इस फैसले से पीड़ित परिवार को वर्षों बाद न्याय मिला है, वहीं क्षेत्र में यह संदेश भी गया है कि कानून हाथ में लेने वालों को कड़ी सजा भुगतनी पड़ेगी.