भरतपुर से विधायक रहे हुमायूं कबीर को पार्टी लाइन से अलग बयान और कार्यक्रम के बाद टीएमसी से निलंबित किया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी “जनता उन्नयन पार्टी” बना ली और दावा किया कि वे चुनाव में बड़ा असर डालेंगे। 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मॉडल’ मस्जिद की प्रतीकात्मक नींव रखी गई थी। मंच से फीता काटा गया और समर्थकों को ईंट लेकर जाते देखा गया। अब 11 फरवरी से निर्माण शुरू करने की बात कही गई है।
कैसा है ‘बाबरी मॉडल’ प्रोजेक्ट?
हुमायूं कबीर का कहना है कि कार्यक्रम धार्मिक रहेगा और किसी वीआईपी को नहीं बुलाया गया है। उनके मुताबिक, कुरान की तिलावत के बाद निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वे अयोध्या की तर्ज पर संरचना बनाने की बात कर रहे हैं। अनुमानित लागत करीब 300 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि अब तक लगभग 6 करोड़ रुपये चंदे के रूप में जुटने का दावा है। लक्ष्य दो साल में निर्माण पूरा करने का है।
चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक हैं और अगले साल उत्तर प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इस ऐलान ने सियासी माहौल गरमा दिया है। बाबरी- अयोध्या कनेक्शन चुनावी बहस को और तेज कर रहा है। विभिन्न दलों के नेताओं के बयान और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने चर्चा को और हवा दी है।
यूपी में बयान और पलटवार
एक वायरल वीडियो में यूपी के मौलाना जर्जिश अंसारी के बयान का जिक्र है, जिसमें उन्होंने सुरक्षा को लेकर टिप्पणी की। इस पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में कहा कि कानून-व्यवस्था पर सरकार सख्ती से काम करती है और अयोध्या में मंदिर बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी। इन बयानों के बाद बहस और तेज हो गई।
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हुमायूं कबीर का जवाब
हुमायूं कबीर का कहना है कि वे संविधान के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका दावा है कि पश्चिम बंगाल में कानून के मुताबिक उन्हें धार्मिक स्थल बनाने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी दबाव से पीछे नहीं हटेंगे। उनके मुताबिक, यह राज्य का मामला है और संविधान के दायरे में सब होगा।
तनाव और प्रशासन की तैयारी
रिपोर्ट्स में बताया गया कि कुछ संगठन यूपी से मुर्शिदाबाद की ओर जाने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने रोका। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या न हो। आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनावी बहस का बड़ा हिस्सा बन सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि निर्माण की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है और सियासत किस दिशा में जाती है।