मेरठ। मुत्युदंड की सजा मिलने के बाद भी मुस्कान को छह साल तक फांसी नहीं होगी। सरकारी अधिवक्ता केके चौबे ने बताया, जेल में बंद रहने के दौरान 24 नवंबर, 2025 को मुस्कान ने छोटी बेटी राधा को जन्म दिया था। ऐसे में बच्ची की उम्र 6 साल होने तक मुस्कान को फांसी नहीं दी जाएगी। इस दौरान बच्ची की देखभाल की जिम्मेदारी मुस्कान की होगी। सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान को उसकी बेटी राधा के साथ लखनऊ के नारी निकेतन में शिफ्ट किया जाएगा। उन्होंने बताया, जजमेंट की कॉपी अभी नहीं मिली है। जजमेंट की कॉपी मिलने के बाद ही तय होगा कि फांसी की स्थिति आगे क्या रहेगी। अगर जजमेंट में मुस्कान की बेटी के लिए कुछ विशेष लिखा गया है तो उसे देखकर ही आगे फांसी की प्रक्रिया को तय किया जाएगा।
मुस्कान की छोटी बेटी को नहीं अपनाएंगे
सौरभ की मां रेणु ने कहा, मुस्कान की छोटी बेटी राधा को हम न तो अपनाना चाहते हैं और न ही अपने साथ रखना चाहते हैं। हमारे ऊपर डीएनए टेस्ट कराने का दबाव बनाया जाएगा, तब भी हम हमारा परिवार नहीं कराएगा। हमें सिर्फ न्याय चाहिए था और वह मिल गया। हालांकि, 24 नवंबर 2025 को मुस्कान की छोटी बेटी के जन्म पर सौरभ की मां ने बच्ची का डीएनए टेस्ट कराने की मांग की थी और कहा था कि अगर बच्ची सौरभ की निकली, तो हम उसे अपने पास रखेंगे, लेकिन फैसला आने के बाद उन्होंने इन्कार कर दिया।
मुस्कान के परिजनों ने भी छोटी बेटी को अपनाने से मना किया
मुस्कान के पिता प्रमोद रस्तोगी और माता कविता ने 14 अक्टूबर को एक पत्र लिखकर पुलिस के जरिए कोर्ट को भेजा था। पत्र में मुस्कान के माता-पिता ने लिखा है कि मुस्कान को चाहे जो सजा मिले, हमें इससे कोई मतलब नहीं है। हम लोग अब कभी मुस्कान से नहीं मिलेंगे। हमें उसकी छोटी बेटी से भी कोई मतलब नहीं है। सजा सुनाए जाने से पहले यह पत्र अदालत को मिल गया था।
सौरभ की बड़ी बेटी पीहू की मांग की थी
सौरभ के भाई राहुल का कहना है कि उन्होंने पीहू को अपने पास रखने की मांग की थी, लेकिन उसके नाना-नानी उसे देने के लिए तैयार नहीं हैं। राहुल का कहना है कि हमें यह भी नहीं पता कि पीहू कैसी है? लंबे समय से हमने उसे देखा तक नहीं है। सौरभ पीहू को लंदन भेजकर पढ़ाना चाहता था।
मुस्कान और साहिल पहनेंगे कैदियों के लिबास
मृत्युदंड का फैसला आने के बाद साहिल और मुस्कान को लेकर जिला कारागार के भीतर भी व्यवस्था बदल गई है। फैसला आने के बाद शाम को जेल प्रशासन की बैठक हुई। 24 घंटे के भीतर दोनों विशेष बैरक में शिफ्ट कर दिया जाएगा। मुस्कान अभी तक बैरक नंबर 12-बी और साहिल शुक्ला बैंक नंबर- 15 में थे। जिला कारागार में दोनों अभी तक सामान्य कपड़े पहनते आ रहे थे। सजा मिलने के बाद मुस्कान अब क्रीम कलर की साड़ी या सूट पहनेगी, जबकि साहिल को सफेद कुर्ता-पजामा पहनना होगा। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा का कहना है कि जजमेंट की कॉपी मिलने के साथ ही नई व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी। जल्द ही दोनों का कैदी नंबर भी अलॉट कर दिया जाएगा।