
Rabbit Without Ear : जापान तकनीक, संस्कृति और विज्ञान के क्षेत्र में विश्व भर में अग्रणी देश माना जाता है, लेकिन यहां के कुछ वैज्ञानिक प्रयोगों और पर्यावरणीय बदलावों के कारण कुछ अजीबोगरीब घटनाएं भी सामने आती हैं. हाल के वर्षों में जापान में कुछ ऐसे खरगोश पाए गए हैं जिनके कान नहीं हैं — यानी ये खरगोश जन्म से ही बिना कान के होते हैं. यह न सिर्फ जैविक रूप से चौंकाने वाला है, बल्कि इससे पर्यावरणीय और वैज्ञानिक चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं.
बिना कान वाले खरगोशों के पैदा होने का मुख्य कारण जापान में हुए कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में रेडियोधर्मी विकिरण (radiation) को माना जा रहा है. खासकर फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना के बाद यह देखा गया कि आसपास के इलाकों में पशु-पक्षियों और अन्य जीवों में जन्मजात विकृतियाँ देखने को मिलीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि विकिरण के कारण डीएनए में बदलाव (mutation) हो सकता है, जिससे जानवरों की सामान्य जैविक संरचना प्रभावित होती है. खरगोशों में कान न होना इसी तरह के एक जेनेटिक म्यूटेशन का उदाहरण माना जा रहा है.
इसके अलावा कुछ पशु
प्रयोगशालाओं में जैविक शोध के दौरान भी ऐसे खरगोशों को जन्म दिया गया है ताकि यह अध्ययन किया जा सके कि विशेष जीन को हटाने या बदलने से शरीर की संरचना पर क्या असर पड़ता है. हालांकि ऐसे प्रयोग नैतिक रूप से विवादास्पद हैं और इन पर पशु अधिकार संगठनों की ओर से समय-समय पर सवाल उठते रहते हैं.
इस तरह के मामले हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक जहां एक ओर जीवन को बेहतर बना रही है, वहीं दूसरी ओर इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं. बिना कान वाले खरगोश केवल एक उदाहरण हैं — ऐसे कई और मामले भी हो सकते हैं जो हमें प्रकृति और विज्ञान के संतुलन को समझने और बनाए रखने की चेतावनी देते हैं.