अल‑फलाह यूनिवर्सिटी को NAAC का भरोसा टूटा : हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित अल‑फलाह यूनिवर्सिटी इस वक्त एक बड़े संकट के बीच है. राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने यूनिवर्सिटी को “झूठे एक्रेडिटेशन क्लेम” के लिए शो‑काज़ (कानूनन जवाब देने) नोटिस जारी किया है. कहा जा रहा है कि विश्वविद्यालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक्रेडिटेशन का गलत और भ्रामक दावा किया था, जिससे छात्रों, अभिभावकों और स्टेकहोल्डर्स को गुमराह किया गया. इसके बाद एमबीबीएस कर रहे कई छात्रों के अभिभावक वीसी (कुलपति) से मिलकर अपने सवाल उठा रहे हैं.
NAAC के नोटिस में यह आरोप लगाया गया है कि अल‑फलाह यूनिवर्सिटी ने अपनी वेबसाइट पर यह दिखाया था कि उसके विभिन्न कॉलेज जैसे इंजीनियरिंग और एजुकेशन स्कूलों को ‘A’ ग्रेड का एक्रेडिटेशन मिला हुआ है। लेकिन यह एक्रेडिटेशन पहले ही समाप्त हो चुका था. वास्तव में, परिषद ने पाया कि यूनिवर्सिटी ने कभी भी संपूर्ण विश्वविद्यालय के लिए NAAC का आवेदन नहीं किया था.
छात्रों के अभिभावक गुस्से में
इस गंभीर जांच के बाद, छात्रों के अभिभावक गुस्से और चिंतित हैं. कई अभिभावक सीधे यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचे और कुलपति (VC) से मुलाकात की. उनका कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को मेडिकल शिक्षा के लिए अल‑फलाह में एडमिशन दिलाया था, लेकिन अब उन्हें डर है कि एक्रेडिटेशन की वैधता न होने के कारण उनकी डिग्री की वेल्यू को धक्का लग सकता है. यूनिवर्सिटी ने इस पूरे विवाद के मद्देनज़र यह सफाई दी है कि वेबसाइट पर जो गलत जानकारी दी गई थी, वह “डिज़ाइन की गलती” की वजह से थी. वे कह रहे हैं कि यह जानबूझकर किया गया दावा नहीं था. लेकिन NAAC ने इस सफाई पर संतुष्टि व्यक्त नहीं की है और यूनिवर्सिटी को सात दिनों के अंदर जवाब देने का समय दिया है.
यह मामला इसलिए और गंभीर हो गया है क्योंकि यह सिर्फ शिक्षा का सवाल नहीं है. पिछले कुछ समय में अल‑फलाह यूनिवर्सिटी सुरक्षा जांचों की भी चर्चा में रही है. कुछ रिपोर्ट्स बताते हैं कि दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले में विश्वविद्यालय का नाम आया था। ऐसे तनावपूर्ण समय में, अभिभावकों की मुलाकात और NAAC की कार्रवाई यह दर्शाती है कि विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता पर गहरी चोट लगी है.
कुल मिलाकर, अल‑फलाह यूनिवर्सिटी की पब्लिक छवि और उसकी शैक्षणिक प्रतिष्ठा दोनों ही संकट में हैं. यदि NAAC द्वारा दिए गए नोटिस का असर गंभीर निकला, तो यूजीसी या अन्य नियामक एजेंसियों की ओर से आगे की सख्त कार्रवाई की संभावना है. वहीं, एमबीबीएस छात्रों के अभिभावकों की चिंता यह है कि वे अपने बच्चों की शिक्षा और भविष्य को लेकर कैसे सुरक्षित महसूस कर सकें. यह विवाद न सिर्फ इस यूनिवर्सिटी के लिए, बल्कि पूरे निजी मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक चेतावनी है.