
हिंदू पंचांग के अनुसार, नाग पंचमी श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व नाग देवता की पूजा-अर्चना के लिए विशेष रूप से समर्पित होता है। वर्ष 2025 में नाग पंचमी 25 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन विशेष रूप से नागों को दूध चढ़ाया जाता है, पूजा-अर्चना की जाती है और उनसे जीवन में सुख-शांति की कामना की जाती है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि नाग पंचमी के दिन लोहे से बनी चीजों का इस्तेमाल नहीं किया जाता? इसके पीछे धार्मिक मान्यता और परंपरा दोनों ही हैं।
इन वस्तुओं का प्रवेश वर्जित
दरअसल, मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन लोहे की वस्तुओं का प्रयोग वर्जित होता है क्योंकि इस दिन भूमि को खुदाई या किसी भी प्रकार से खोदना अशुभ माना जाता है। प्राचीन समय में लोग यह मानते थे कि नाग पंचमी के दिन नाग अपने बिलों में विश्राम करते हैं, और जमीन में खुदाई करने से उनके स्थानों को नुकसान पहुंच सकता है। लोहे के औजार जैसे फावड़ा, कुदाल, बेलचा आदि आमतौर पर खुदाई के लिए प्रयोग किए जाते हैं, इसलिए इनका प्रयोग इस दिन वर्जित होता है।
जानें धार्मिक पक्ष
इसके अलावा एक धार्मिक पक्ष यह भी है कि लोहे को तमोगुणी धातु माना जाता है, जो पूजा-पाठ या शुभ कार्यों के समय वर्जित होता है। नाग पंचमी एक अत्यंत पवित्र और सात्विक दिन होता है, जिसमें लोहे की वस्तुओं से दूरी बनाकर आध्यात्मिक ऊर्जा को अक्षुण्ण बनाए रखने की परंपरा रही है।कुछ क्षेत्रों में तो यह भी मान्यता है कि नाग देवता को लोहे की गंध पसंद नहीं है और इससे उनका आक्रोश भी हो सकता है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में इस दिन खेती से जुड़े सभी कार्य रोक दिए जाते हैं और घर में भी लोहे के बर्तनों का उपयोग कम किया जाता है।नाग पंचमी केवल एक पर्व नहीं बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति श्रद्धा और संरक्षण का प्रतीक है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि हमें धरती और उसके जीवों के साथ सामंजस्य बनाकर चलना चाहिए। लोहे का त्याग इस दिन केवल परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान का एक रूप है।