Nag Panchami Katha 2026: नाग पंचमी का पर्व आज यानी 17 अगस्त 2026 को मनाया जा रहा है। सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ने वाले इस पर्व पर नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धालु इस दिन नाग देवता को दूध, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन विधि-विधान से पूजा करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है। नाग पंचमी की पूजा में व्रत कथा सुनने या पढ़ने का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कथा के बिना नाग पंचमी की पूजा को पूर्ण नहीं माना जाता। इसलिए पूजा के समय इस पौराणिक कथा का पाठ जरूर किया जाता है।
नाग पंचमी की पौराणिक कथा
बहुत समय पहले एक साहूकार का परिवार था। उसके सात बेटे थे और सभी का विवाह हो चुका था। सातों बहुओं में सबसे छोटी बहू अपने अच्छे व्यवहार और सरल स्वभाव के लिए जानी जाती थी। उसके मायके में कोई भाई नहीं था। एक दिन घर की महिलाएं मकान की लिपाई के लिए मिट्टी लेने बाहर गईं। मिट्टी खोदते समय उन्हें एक सांप दिखाई दिया। बड़ी बहू उसे मारने के लिए आगे बढ़ी, लेकिन छोटी बहू ने उसे रोक दिया। उसने कहा कि सांप ने किसी का नुकसान नहीं किया है, इसलिए उसे मारना उचित नहीं होगा। उसकी बात मानकर सांप को छोड़ दिया गया। जाने से पहले छोटी बहू ने सांप से कहा कि वह थोड़ी देर बाद वापस आएगी, इसलिए वहीं उसका इंतजार करे। लेकिन घर लौटने के बाद वह घरेलू कामों में व्यस्त हो गई और अपना वादा भूल गई।
अगले दिन उसे अपनी बात याद आई। वह तुरंत उसी जगह पहुंची, जहां सांप को रुकने के लिए कहा था। हैरानी की बात थी कि सांप अभी भी वहीं मौजूद था। छोटी बहू ने उसे भाई कहकर प्रणाम किया और अपनी भूल के लिए माफी मांगी। सांप ने कहा कि वह उसे डस सकता था, लेकिन छोटी बहू ने उसे भाई का दर्जा दिया है, इसलिए वह उसे नुकसान नहीं पहुंचाएगा। इसके बाद दोनों के बीच भाई-बहन का रिश्ता बन गया। छोटी बहू ने बताया कि उसका अपना कोई भाई नहीं है और अब उसे भाई मिलने की खुशी है।
सांप भाई बनकर बहन को ले गया घर
कुछ समय बाद वही नाग मनुष्य का रूप लेकर छोटी बहू के ससुराल पहुंचा। उसने खुद को उसका भाई बताया और बहन को कुछ दिनों के लिए अपने घर ले जाने की इच्छा जताई। परिवार ने उसे जाने की अनुमति दे दी। रास्ते में नाग ने छोटी बहू को सच्चाई बता दी कि वह वही सांप है, जिसे उसने बचाया था। यह जानकर छोटी बहू बहुत खुश हुई। वह उसके साथ नागलोक पहुंची, जहां उसने अपार धन-संपत्ति देखी। वहां कुछ दिन रहने के बाद एक दिन नाग की मां ने छोटी बहू से कहा कि वह उसके बेटे को ठंडा दूध पिला दे। लेकिन छोटी बहू को यह बात याद नहीं रही और उसने गलती से गर्म दूध दे दिया। इससे नाग का मुंह जल गया और उसकी मां नाराज हो गई। बाद में नाग के समझाने पर उसका गुस्सा शांत हुआ और छोटी बहू को विदा करते समय परिवार ने उसे काफी धन-संपत्ति भी दी।
भाई ने बहन को दिया अनमोल हार
ससुराल लौटने के बाद छोटी बहू के पास मौजूद धन देखकर घर की बड़ी बहू को हैरानी हुई। उसने ताना मारते हुए कहा कि अगर उसका भाई इतना संपन्न है तो उससे और धन मंगवाना चाहिए। जब यह बात नाग भाई तक पहुंची तो वह अपनी बहन की मदद करता रहा। एक दिन उसने छोटी बहू को बेहद कीमती रत्नों और हीरों से बना एक सुंदर हार दिया। उसकी खूबसूरती इतनी अद्भुत थी कि इसकी चर्चा राजमहल तक पहुंच गई। राजा ने हार के बारे में पता चलने पर सेठ को दरबार में बुलाया। डर के कारण सेठ ने वह हार रानी को दे दिया। इससे छोटी बहू को बहुत दुख हुआ। उसने अपने नाग भाई से मदद मांगी।
यह भी पढ़ें: Nag Panchami Par Kya Na Kare: नाग पंचमी पर इन 5 चीजों से रहें दूर, वरना बिगड़ सकता है आपका भाग्य
रानी के गले में हार बन गया सांप छोटी बहू ने अपने भाई से कहा कि जब रानी उस हार को पहने तो वह सांप बन जाए और उसके गले में आते ही फिर से आभूषण का रूप ले ले। नाग ने बहन की बात स्वीकार कर ली। जब रानी ने हार पहना तो वह अचानक सांप में बदल गया। रानी घबराकर चीखने लगीं। राजा को मामला समझ में नहीं आया और उन्होंने छोटी बहू को दरबार में बुलाकर जवाब मांगा। छोटी बहू ने बताया कि यह हार उसके नाग भाई ने दिया है और उसके अलावा कोई दूसरा इसे पहनता है तो यह सांप का रूप ले लेता है। उसने जैसे ही हार अपने गले में पहना, वह फिर से चमकते हुए रत्नों का हार बन गया। यह देखकर राजा काफी प्रभावित हुए और उन्होंने छोटी बहू को कई उपहार दिए।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।