नजमुल हसन शांतो ने पाकिस्तान के खिलाफ ढाका टेस्ट में शानदार शतक जड़कर इतिहास रच दिया है। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच के शुरुआती दिन शांतो ने कप्तानी पारी खेलते हुए 130 गेंदों में 101 रन बनाए। उनकी इस शानदार पारी में 12 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। शांतो की इस सेंचुरी ने बांग्लादेश क्रिकेट इतिहास में नया रिकॉर्ड बना दिया। अब वह टेस्ट क्रिकेट में बांग्लादेश के लिए सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले कप्तान बन गए हैं।
मुश्फिकुर रहीम का रिकॉर्ड टूटा
शांतो ने इस पारी के साथ मुश्फिकुर रहीम का बड़ा रिकॉर्ड तोड़ दिया। मुश्फिकुर रहीम ने कप्तान रहते हुए टेस्ट क्रिकेट में 4 शतक लगाए थे, जबकि शांतो अब 5 टेस्ट शतक के साथ पहले स्थान पर पहुंच गए हैं। खास बात यह रही कि शांतो ने यह उपलब्धि सिर्फ 30 पारियों में हासिल कर ली। वहीं मुश्फिकुर रहीम को 4 शतक तक पहुंचने में 61 पारियां लगी थीं। तीसरे नंबर पर मोमिनुल हक हैं, जिन्होंने कप्तान के तौर पर 3 टेस्ट शतक लगाए थे।
पाकिस्तान के खिलाफ जिम्मेदार पारी
ढाका के शेरे बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे इस मुकाबले में बांग्लादेश को मजबूत शुरुआत की जरूरत थी। ऐसे समय में शांतो ने जिम्मेदारी संभाली और टीम को संभालने वाली पारी खेली। उन्होंने पाकिस्तान के गेंदबाजों के खिलाफ धैर्य और आक्रामकता दोनों का शानदार संतुलन दिखाया। हालांकि उनकी पारी का अंत मोहम्मद अब्बास ने LBW आउट कर किया, लेकिन तब तक शांतो रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज करा चुके थे।
बांग्लादेश क्रिकेट के लिए बड़ा संकेत
पिछले कुछ समय से शांतो लगातार बल्ले से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। कप्तानी संभालने के बाद उनके खेल में और परिपक्वता देखने को मिली है। पाकिस्तान जैसी मजबूत टीम के खिलाफ यह शतक बांग्लादेश क्रिकेट के लिए भी बड़ा संकेत माना जा रहा है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि शांतो अब टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल हो चुके हैं और आने वाले समय में बांग्लादेश टेस्ट क्रिकेट की बड़ी ताकत बन सकते हैं।
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दूसरे टेस्ट पर भी नजरें
बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच दूसरा टेस्ट मुकाबला 16 मई से सिलहट इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मैच भारतीय समयानुसार सुबह 9:30 बजे शुरू होगा। फिलहाल पहले टेस्ट में शांतो की सेंचुरी ने पूरी क्रिकेट दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पाकिस्तान के खिलाफ कप्तानी शतक लगाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह सिर्फ कप्तान ही नहीं बल्कि बड़े मैचों के बड़े खिलाड़ी भी हैं।