देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। इसकी कमान इंफोसिस के सह-संस्थापक और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है। दिलचस्प बात यह है कि नीलेकणि वर्ष 2014 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें यह जिम्मेदारी दिए जाने के पीछे उनके तकनीकी अनुभव और बड़े राष्ट्रीय डिजिटल प्रोजेक्ट्स में निभाई गई भूमिका को अहम माना जा रहा है।
कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुके हैं लोकसभा चुनाव
नंदन नीलेकणि ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु दक्षिण सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। अब एक बार फिर वे राष्ट्रीय स्तर की अहम जिम्मेदारी संभालते नजर आएंगे।
'आधार' परियोजना से मिली राष्ट्रीय पहचान
भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली 'आधार' को आकार देने में नंदन नीलेकणि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 2009 में उन्हें यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके नेतृत्व में आधार परियोजना को लागू किया गया, जिसने देश में डिजिटल पहचान व्यवस्था को नई दिशा दी।
डिजिटल पेमेंट और UPI के विस्तार में निभाई अहम भूमिका
नंदन नीलेकणि डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत बनाने वाले प्रमुख विशेषज्ञों में शामिल रहे हैं। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के विकास और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली विभिन्न समितियों में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय समावेशन से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है।
एआई और परीक्षा सुधार से जुड़े अनुभव बने मजबूत आधार
नीलेकणि न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से जुड़ी विशेषज्ञ समिति का हिस्सा रह चुके हैं। इससे पहले प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं की समीक्षा के लिए गठित एक समिति में भी उन्होंने योगदान दिया था। बड़े तकनीकी प्रोजेक्ट्स के संचालन और डिजिटल सिस्टम विकसित करने का उनका अनुभव शिक्षा सुधार के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
शिक्षा सुधार टास्क फोर्स की कमान क्यों मिली?
प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बाद सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए व्यापक सुझाव चाहती है। इसी उद्देश्य से गठित हाई पावर्ड टास्क फोर्स की जिम्मेदारी नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है। माना जा रहा है कि डिजिटल सिस्टम, पारदर्शिता और तकनीक आधारित समाधान विकसित करने का उनका अनुभव परीक्षा प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बनाने में मददगार साबित हो सकता है।