भारत के प्राचीन मंदिरों में एक अनोखा मंदिर ऐसा भी है, जहां नंदी भगवान की मूर्ति धीरे-धीरे बढ़ रही है. हैरान कर देने वाली बात यह है कि इस मूर्ति का आकार हर 20 साल में लगभग एक इंच बढ़ जाता है. वैज्ञानिक भी इस घटना का कारण आज तक नहीं समझ सके हैं. यह रहस्य आज भी अज्ञात है, लेकिन भक्तों की आस्था इससे और गहरी हो गई है.
पुष्पा-2 से मिली पहचान, पर है गहरा इतिहास
इस रहस्यमयी मंदिर को हाल ही में फिल्म पुष्पा-2 में दिखाया गया था, लेकिन बहुत कम लोग इसके वास्तविक चमत्कारों और मान्यताओं से परिचित हैं. मंदिर का नाम है श्री यांगती उमा महेश्वर मंदिर, जो आंध्र प्रदेश के कुरनूल ज़िले में स्थित है. यह हैदराबाद से 308 किमी और विजयवाड़ा से 359 किमी की दूरी पर है.
विजयनगर साम्राज्य की धरोहर
मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के संगम वंश के राजा हरिहर बुक्का राय द्वारा कराया गया था. इसकी वास्तुकला वैष्णव परंपरा पर आधारित है, लेकिन इसमें भगवान शिव के अर्धनारीश्वर रूप की पूजा की जाती है. मंदिर पल्लव, चोल, चालुक्य और विजयनगर की स्थापत्य शैलियों का अद्भुत संगम है.
ऋषि अगस्त्य से जुड़ी है स्थापना की कथा
मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं अगस्त्य ऋषि ने की थी. वे यहां भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर बनाना चाहते थे, लेकिन मूर्ति का अंगूठा टूट गया. तब उन्होंने भगवान शिव की तपस्या की, जिसके बाद शिव प्रकट हुए और इस स्थान को ‘कैलाश समान’ बताकर यहीं मंदिर बनवाने को कहा.
कौए नहीं आते, शनिदेव का असर नहीं
इस मंदिर में कौए नहीं दिखाई देते. कथा है कि तप करते समय अगस्त्य ऋषि को कौए परेशान कर रहे थे, जिससे क्रोधित होकर उन्होंने कौओं को श्राप दे दिया कि वे यहां कभी न आएं. साथ ही, कहा जाता है कि यहां शनिदेव का कोई प्रभाव नहीं चलता.
कलयुग के अंत की भविष्यवाणी
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, नंदी की यह मूर्ति कलयुग के अंत तक विशाल रूप लेकर जीवित हो उठेगी. उसी दिन महाप्रलय आएगा और कलयुग का समापन होगा. इस रहस्य और आस्था के चलते यह मंदिर न सिर्फ आध्यात्मिक केंद्र बना है, बल्कि रहस्यमय रोमांच का प्रतीक भी.