Narmadaflood: मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी उफान पर है और इसके चलते रायसेन से लेकर नरसिंहपुर तक के कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बरगी डैम के गेट खोलने से नदी किनारे बसे गांवों में पानी घुस गया है, जिससे गांवों का मुख्यालयों से संपर्क टूट गया है। कई मंदिर जलमग्न हो चुके हैं और ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है। बाढ़ से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
निचले गांवों में घुसा पानी, कई गांवों का टूटा संपर्क
रायसेन जिले के उदयपुरा तहसील के करीब 60 किलोमीटर इलाके में नर्मदा किनारे बसे टिमरावन, रमपुरा, गहलावन, पतई, अंडिया, कैलकच्छ, चौरास, बोरास जैसे गांवों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है। बोरास पुल चार फीट पानी में डूब चुका है। नर्मदा की सहायक नदी खांड में आई बाढ़ से चंदपुरा, कानीबाड़ा और बारह गांवों में भी हालात गंभीर हैं।
बैक वॉटर से गांवों की घेराबंदी, नहीं मिल पा रही मदद
बगलबाड़ा और मांगरोल जैसे गांवों का बरेली मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। गांव चारों तरफ से पानी में घिरे हुए हैं। सिलापोर पुल और अन्य संपर्क मार्गों पर पानी भरने से यातायात पूरी तरह बाधित है। बरेली तहसीलदार रामजीलाल वर्मा ने बताया कि बैकवॉटर के चलते रपटों पर पानी बह रहा है, जिससे गांवों में फंसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
अधूरा पुल बना संकट, स्कूल और इलाज प्रभावित
सिलवानी के मनकवाड़ा रोड पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बन रहा पुल पिछले कई महीनों से अधूरा पड़ा है। 1.5 करोड़ की लागत से बन रहा यह पुल बारिश में लोगों की परेशानी का सबब बन गया है। देनी, मानकवाड़ा सहित 5 गांवों के करीब 3 हजार लोग सिलवानी से कट चुके हैं। बच्चों का स्कूल जाना, बीमारों को अस्पताल पहुंचाना दूभर हो गया है।
वैकल्पिक रास्ता भी बहा, प्रशासन को चेताया
बारिश में अस्थाई रास्ता भी बह चुका है, जिससे ग्रामीणों को अब 30 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। ठेकेदार पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं और निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। एसडीएम पीसी शाक्य ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारियों को पत्र लिखकर जल्द समाधान की मांग की जाएगी।