मध्य प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी के तटों को हराभरा करने के लिए एक बड़े अभियान का ऐलान किया है। 15 जुलाई से शुरू होने जा रही 'गंगोत्री हरित परियोजना' के तहत प्रदेश के 16 जिलों में 7.5 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इस कार्य पर सरकार कुल 43 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इस योजना का मकसद न सिर्फ पर्यावरण को बेहतर बनाना है, बल्कि नर्मदा नदी के किनारे जैव विविधता को बढ़ावा देना भी है।
किन
जिलों में चलेगा पौधारोपण
अभियान?
इस अभियान की शुरुआत नर्मदा नदी के किनारे स्थित 16 जिलों से की जा रही है, जिनमें शामिल हैं:
नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला, जबलपुर, सिवनी, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, खंडवा, देवास और हरदा।
कैसे होगा पौधारोपण का क्रियान्वयन?
तारीख़: पौधारोपण 15 जुलाई से शुरू होकर 15 अगस्त तक चलेगा।
स्थान: नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों की 233 जगहों पर 1000 एकड़ भूमि में पौधे लगाए जाएंगे।
तैयारी: 14 जुलाई तक गड्ढों की खुदाई और तार फेंसिंग का काम पूरा करना अनिवार्य होगा।
तकनीक से निगरानी और योजना का सटीक संचालन
ड्रोन और सैटेलाइट से पौधारोपण कार्य की निगरानी की जाएगी।
'सिपरी' नामक सॉफ्टवेयर के जरिए तय होगा कि पौधे किस स्थान पर लगेंगे।
मनरेगा के तहत स्थानीय लोगों को इस योजना से जोड़ा जाएगा, जिससे रोजगार भी बढ़ेगा।
क्या है ‘गंगोत्री हरित परियोजना’?
'गंगोत्री हरित परियोजना' राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य नर्मदा नदी के किनारे जैविक सुरक्षा कवच बनाना है। यह पर्यावरण संरक्षण और नदी तटीय क्षेत्रों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
सरकार
का उद्देश्य और लाभ
नर्मदा
किनारे हरियाली बढ़ेगी
पर्यावरण संतुलन बेहतर होगा
नर्मदा परिक्रमा मार्ग को सुंदर और सुरक्षित बनाया जाएगा
ग्राम पंचायतों को 10 एकड़ में फेंसिंग खर्च की सहायता दी जाएगी
नर्मदा नदी को हरियाली का नया जीवन देने जा रही यह परियोजना न सिर्फ पर्यावरण के लिहाज से अहम है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोज़गार और स्वच्छता को भी मजबूती देगी। सरकार की यह पहल आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से लड़ने में सहायक साबित हो सकती है।