Narottam Mishra: शिवपुरी में ब्राह्मण समाज के सम्मान समारोह में पहुंचे मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के एक बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। मिश्रा ने अपने संबोधन में सांप और जुगनू की कहानी सुनाई और कहा कि जुगनू की चमक सांप से देखी नहीं जा रही थी। उनके इस उदाहरण को लेकर अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। हालांकि, मिश्रा ने किसी नेता का नाम लेकर इसे पार्टी की अंदरूनी राजनीति से नहीं जोड़ा।
ब्राह्मण समाज के कार्यक्रम में सुनाई कहानी
शिवपुरी में आयोजित ब्राह्मण समाज के प्रतिभा एवं सम्मान समारोह में नरोत्तम मिश्रा ने समाज की एकता और सम्मान पर बात की। इसी दौरान उन्होंने एक मित्र के सवाल का जिक्र करते हुए सांप और जुगनू की कहानी सुनाई।
‘तेरी चमक देखी नहीं जा रही’
मिश्रा के मुताबिक, कहानी में सांप लगातार जुगनू का पीछा करता है। जुगनू उससे पूछता है कि जब दोनों के बीच कोई दुश्मनी नहीं है तो वह उसके पीछे क्यों पड़ा है। इस पर सांप जवाब देता है कि उसे जुगनू की चमक देखी नहीं जा रही। मिश्रा ने इस उदाहरण को ब्राह्मण समाज के खिलाफ की जा रही टिप्पणियों के संदर्भ में रखा।
मंच से लगे समर्थन में नारे
मिश्रा की कहानी के बाद कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं की ओर से उनके समर्थन में नारे लगाए गए। इस दौरान उनके संघर्ष और नेतृत्व को लेकर भी नारे सुनाई दिए। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस प्रतिक्रिया को किसी खास राजनीतिक नेता के खिलाफ नारे के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।
क्या बयान में छिपा था कोई सियासी संदेश?
मिश्रा के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग इसे भाजपा की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि उनके संबोधन का तत्काल संदर्भ ब्राह्मण समाज पर की जा रही टिप्पणियां और समाज की एकता था। इसलिए किसी खास भाजपा नेता को इसका निशाना बताना फिलहाल अनुमान ही माना जाएगा।
अपनी राजनीतिक जमीन को लेकर भी चर्चा
कार्यक्रम के बाद मिश्रा से भाजपा में ब्राह्मण समाज की भूमिका और गुना-शिवपुरी क्षेत्र में उनकी राजनीतिक सक्रियता को लेकर सवाल किए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने पार्टी में ब्राह्मण समाज की भूमिका को सर्वोच्च स्तर पर बताया और गुना-शिवपुरी में राजनीतिक जमीन तलाशने से जुड़े कयासों को खारिज किया।