लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम से समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। नए शैक्षणिक सत्र से कक्षा 5वीं और 6वीं में भी एनसीईआरटी पैटर्न की पुस्तकों से पढ़ाई शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) से कक्षा 5वीं और 6वीं में एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) पैटर्न की पाठ्यपुस्तकों को अपनाया जाएगा। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम से जोड़ने की दिशा में अहम है।
वर्तमान में परिषदीय स्कूलों में कक्षा 1 से 4 तक ही एनसीईआरटी आधारित किताबें पढ़ाई जा रही हैं, लेकिन अब कक्षा 5 और 6 को भी इसमें शामिल करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इससे छात्रों को केंद्रीय बोर्ड (सीबीएसई) और अन्य राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रमों से बेहतर तालमेल बिठाने में मदद मिलेगी। एनसीईआरटी की किताबें सरल भाषा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समग्र विकास पर केंद्रित होती हैं, जो बच्चों में गहन समझ विकसित करती हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी बताते हैं कि यह परिवर्तन धीरे-धीरे सभी कक्षाओं में लागू किया जाएगा, ताकि परिषदीय स्कूलों के छात्र भी प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में आगे रह सकें। किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समय से पहले छपाई और वितरण की व्यवस्था की जा रही है, ताकि सत्र की शुरुआत में कोई देरी न हो। पिछले सत्रों में किताब वितरण में हुई देरी से सबक लेते हुए इस बार सख्त तैयारी की गई है।
यह फैसला ग्रामीण और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि एनसीईआरटी किताबें सस्ती और गुणवत्तापूर्ण होती हैं। इससे निजी प्रकाशकों की महंगी गाइड बुक पर निर्भरता भी कम होगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता आएगी और राष्ट्रीय स्तर पर छात्रों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।