राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। इसे राष्ट्रगान की तरह सम्मान दिलाने के लिए नए नियम और प्रोटोकॉल तय किए जा सकते हैं। गृह मंत्रालय स्तर पर इस विषय पर गहन मंथन हुआ है, जिसमें यह चर्चा की गई कि इसके गायन के दौरान खड़ा होना अनिवार्य किया जाए या नहीं और अपमान की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान हो।
नया प्रोटोकॉल बनाने पर सरकार का मंथन
सूत्रों के मुताबिक हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में राष्ट्रीय गीत के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तय करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि वंदे मातरम को कब, कहां और किस तरीके से गाया जाए, इसके लिए एक औपचारिक ढांचा तैयार किया जाए। साथ ही इसे राष्ट्रगान के समान सम्मान देने की दिशा में ठोस नियम बनाए जा सकते हैं।
राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत में क्या है फर्क?
वर्तमान व्यवस्था के तहत राष्ट्रगान के समय खड़ा होना अनिवार्य है और इसके अपमान पर कानूनी सजा का प्रावधान मौजूद है। लेकिन राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के लिए अब तक ऐसा कोई लिखित या दंडात्मक नियम लागू नहीं किया गया है। सरकार इसी अंतर को खत्म करने पर विचार कर रही है ताकि दोनों प्रतीकों को समान सम्मान मिल सके।
कानूनी कार्रवाई और जुर्माने पर भी विचार
बैठक में यह सवाल भी उठा कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है तो क्या उस पर जुर्माना लगाया जाए या कानूनी कार्रवाई हो। इस मुद्दे पर विस्तृत कानूनी परीक्षण की जरूरत बताई गई है। यदि नया प्रोटोकॉल लागू होता है तो इसके तहत नागरिकों और संस्थानों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
राजनीतिक बहस भी हुई तेज
राष्ट्रीय गीत को लेकर लंबे समय से राजनीतिक स्तर पर मतभेद सामने आते रहे हैं। कुछ दलों ने अतीत के फैसलों को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि दूसरे पक्ष ने इतिहास से छेड़छाड़ के आरोपों को खारिज किया है। पिछले कुछ वर्षों में अदालतों में भी कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें वंदे मातरम के लिए राष्ट्रगान जैसा ही ढांचा बनाने की मांग की गई है।
स्वाधीनता आंदोलन से जुड़ा गौरवशाली इतिहास
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम स्वदेशी आंदोलन के दौरान आज़ादी का प्रमुख नारा बनकर उभरा था। सरकार अब इसे दोबारा उसी गौरवशाली स्थान पर स्थापित करने की कोशिश कर रही है। प्रस्तावित नियमों को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श और कानूनी समीक्षा किए जाने की संभावना है।