भोपाल। भारत के सैन्य इतिहास में पहली बार थल, जल और वायु सेना का संयुक्त सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। ‘राष्ट्रीय रण संवाद 2025’ नामक यह आयोजन मध्यप्रदेश के महू में 26 से 28 अगस्त तक होगा। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युद्ध पद्धति में नवाचार और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विमर्श करना है। 27 अगस्त को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीडीएस जनरल अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुख इसमें शामिल होंगे।
नो-फ्लाई जोन में बदला महू
कार्यक्रम की सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए महू को 26 से 28 अगस्त तक नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। इस दौरान आसपास के क्षेत्रों में किसी भी तरह के ड्रोन या हवाई उपकरणों के उड़ान भरने पर रोक रहेगी। यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे इस आयोजन की रणनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए उठाया गया है।
पहली बार तीनों सेनाओं का साझा मंच
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार थल सेना, वायु सेना और जल सेना के शीर्ष अधिकारी एक ही मंच पर रणनीतिक विमर्श करेंगे। इसमें युद्धक रणनीतियों, आधुनिक तकनीक के प्रभाव, सुरक्षा चुनौतियों और भविष्य की युद्ध पद्धतियों पर गहन चर्चा होगी।
विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों की भागीदारी
रण संवाद 2025 केवल सेनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रक्षा उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह पहल भारत के रक्षा क्षेत्र को नई दिशा देने और वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने की ओर एक अहम कदम मानी जा रही है।