भारत में नैचुरल गैस की खपत बीते कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। सीएनजी और पीएनजी का दायरा शहरों से गांवों तक फैल रहा है। उद्योगों में कोयले और डीजल की जगह गैस को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार भी स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। इसी वजह से अनुमान है कि साल 2030 तक देश में नैचुरल गैस की खपत 103 अरब घन मीटर तक पहुंच सकती है, जो मौजूदा स्तर से करीब 60 प्रतिशत ज्यादा होगी।
अभी कितनी है नैचुरल गैस की कीमत
फिलहाल भारत में नैचुरल गैस की कीमत करीब 280 से 290 रुपये प्रति एमएमबीटीयू के आसपास चल रही है। कमोडिटी बाजार में भी गैस इसी रेंज में कारोबार कर रही है। अभी कीमतें काबू में हैं, लेकिन बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता आने वाले समय में बड़ा असर डाल सकती है। खासतौर पर एलएनजी के दाम बढ़ने से घरेलू बाजार पर दबाव बन सकता है।
2027 तक कहां पहुंच सकती है कीमत
आने वाले दो से तीन सालों में गैस की मांग और तेज होने की उम्मीद है। नए गैस पाइपलाइन नेटवर्क, सिटी गैस प्रोजेक्ट और इंडस्ट्रियल यूज से खपत बढ़ेगी। ऐसे में 2027 तक नैचुरल गैस की कीमत 350 से 440 रुपये प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच सकती है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बाधित हुई, तो दाम और ऊपर जा सकते हैं।
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2028 और 2029 में क्या रहेगा ट्रेंड
2028 तक एलएनजी की नई सप्लाई कैपेसिटी बाजार में आ सकती है, जिससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। लेकिन मांग का दबाव बना रहेगा। इसी वजह से कीमतें 360 से 460 रुपये के दायरे में बनी रह सकती हैं। 2029 तक आयात पर निर्भरता और घरेलू उत्पादन की सीमाएं कीमतों को 370 से 480 रुपये प्रति एमएमबीटीयू तक ले जा सकती हैं।
2030 में कितनी महंगी हो सकती है गैस
विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक गैस की मांग चरम पर होगी। उस समय नैचुरल गैस की कीमत 380 से 500 रुपये प्रति एमएमबीटीयू के बीच रह सकती है। साफ है कि लंबे समय में गैस सस्ती नहीं बल्कि धीरे-धीरे महंगी होती दिखेगी।
आम लोगों की जेब पर क्या पड़ेगा असर
अगर गैस महंगी होती है, तो इसका सीधा असर सीएनजी, पीएनजी, बिजली और ट्रांसपोर्ट पर पड़ेगा। रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। मिडिल क्लास परिवारों का बजट और छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ेगी। इसलिए आने वाले सालों में गैस की कीमत आम लोगों के लिए बड़ा मुद्दा बन सकती है।