जब भी किसी देश की बात होती है, तो राजधानी का ज़िक्र ज़रूर आता है। राजधानी वह जगह होती है जहां सरकार बैठती है, नीति बनती है और देश चलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा भी देश है जिसकी कोई आधिकारिक राजधानी नहीं है? इस देश का नाम है नॉरू (Nauru)। दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित यह छोटा-सा देश न केवल बिना राजधानी वाला एकमात्र गणराज्य है, बल्कि यहां की जीवनशैली भी दुनिया से बिल्कुल अलग और अनजानी है।
कहाँ है नॉरू और क्या है इसकी खासियत?
नॉरू माइक्रोनेशिया क्षेत्र में स्थित है और इसका क्षेत्रफल मात्र 21 वर्ग किलोमीटर है। यह दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है और इसकी आबादी केवल 11 हजार के आसपास है। यहां न तो कोई राजधानी है और न ही कोई बड़े शहर, बल्कि देश का संचालन यारेन जिले (Yaren District) से किया जाता है, जहां संसद और सरकारी दफ्तर स्थित हैं, लेकिन इसे आधिकारिक राजधानी का दर्जा नहीं दिया गया है।
नारियल बेचकर होती है
आजीविका
नॉरू में पहले फॉस्फेट खनन से भारी कमाई होती थी, लेकिन अब वहां के लोग नारियल बेचकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। यहां के लोग अत्यंत साधारण जीवन जीते हैं। नॉरू को 'हैप्पी आईलैंड' भी कहा जाता है, क्योंकि यहां जीवन तनाव मुक्त और शांत है। नारियल के पेड़ यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं।
पर्यटन और संस्कृति
नॉरू का पर्यटन उद्योग लगभग नगण्य है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2011 में यहां केवल 200 पर्यटक आए थे। इसकी प्रमुख वजह है—कम जानकारी, सीमित उड़ानें और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी। यहां ईसाई धर्म के अनुयायी मिलते हैं, लेकिन धर्म का प्रभाव बहुत गहरा नहीं है। यहां की पारंपरिक 12 जनजातियों का इतिहास और माइक्रोनेशियन-पॉलिनेशियन संस्कृति आज भी लोगों के जीवन में झलकती है।
आज भी छिपा है कई रहस्यों
से भरा
करीब 3000 साल पहले माइक्रोनेशियन और पॉलिनेशियन लोगों ने इस द्वीप को बसाया था। नॉरू का झंडा भी इसकी सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक अस्मिता को दर्शाता है। यह छोटा-सा देश आज भी विश्व की नजरों से लगभग अछूता है, लेकिन अपनी अनोखी विशेषताओं के कारण चर्चा में बना रहता है।