Nautapa 2026: ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाला नौतपा इस बार आज से शुरू हो गया है। मान्यता है कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब धरती पर सबसे अधिक गर्मी पड़ती है और यही नौ दिनों का समय नौतपा कहलाता है। इस दौरान तापमान तेजी से बढ़ता है और लू चलने की संभावना भी अधिक रहती है। धार्मिक दृष्टि से यह समय तप, दान और संयम का माना जाता है, जबकि वैज्ञानिक रूप से शरीर को विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
क्यों खास माना जाता है नौतपा?
ज्योतिष शास्त्र में नौतपा को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इन नौ दिनों की तेज गर्मी बारिश के मौसम को संतुलित करने में मदद करती है। यदि नौतपा के दौरान अच्छी गर्मी पड़े तो आने वाला मानसून बेहतर माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान भी इस समय को खेती और मौसम के संकेतों से जोड़कर देखते हैं। इसलिए नौतपा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि प्राकृतिक दृष्टि से भी खास महत्व रखता है।
नौतपा में क्या करें?
इन दिनों शरीर को ठंडा और स्वस्थ रखना सबसे जरूरी माना जाता है। अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए और घर से बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखना चाहिए। मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा और दही का सेवन लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय जल का दान, पक्षियों के लिए पानी रखना और जरूरतमंदों को छाता या वस्त्र देना शुभ फल देता है। सुबह जल्दी उठकर सूर्य देव को जल अर्पित करना भी लाभकारी माना जाता है।
इन गलतियों से बचना है जरूरी
नौतपा के दौरान तेज धूप में लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए। खाली पेट घर से बाहर निकलना और बहुत ज्यादा तला-भुना भोजन करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। दिन के समय अत्यधिक मेहनत करने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसके अलावा बासी भोजन और ठंडी-गर्म चीजों का एक साथ सेवन करने से भी परेशानी बढ़ सकती है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
सेहत और संयम दोनों का रखें ध्यान
नौतपा के ये नौ दिन तपती गर्मी के साथ धैर्य और अनुशासन का संदेश भी देते हैं। इस दौरान छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर खुद को लू और डिहाइड्रेशन से बचाया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान-पुण्य और संयम से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इसलिए आने वाले नौ दिनों में स्वास्थ्य के साथ-साथ दिनचर्या का भी विशेष ध्यान रखना जरूरी है।