
हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष का विशेष महत्व होता है। यह समय उन पूर्वजों को समर्पित होता है जिन्होंने हमें यह जीवन, संस्कृति और परंपराएं दीं। पितृ पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी कहा जाता है, जो विशेष रूप से दिवंगत माताओं और महिला पूर्वजों के श्राद्ध के लिए समर्पित होती है। इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक श्राद्ध कर्म करने से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद स्वरूप परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
मातृ नवमी का महत्व
मातृ नवमी के दिन उन माताओं, दादी, नानी, सास या किसी भी महिला पूर्वज जिनका निधन नवमी तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्राद्ध करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और पितर लोक में उन आत्माओं को शांति मिलती है। यह दिन खासतौर पर मातृ शक्ति को श्रद्धांजलि देने का अवसर होता है।
श्राद्ध विधि
प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
पूर्वजों के नाम का उच्चारण करते हुए तिल, जल, पुष्प, अक्षत आदि से तर्पण करें।
पंडित या ब्राह्मण को आमंत्रित करके श्राद्ध भोज और दान दें।
यदि संभव हो तो जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करें।
ये करें अर्पित
पितरों की प्रिय वस्तुएं अर्पित करें जैसे खीर, पूरी, फल आदि।श्राद्ध में सच्ची श्रद्धा और भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है। यह कर्म केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।
कुतुप मुहूर्त का महत्व
श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त को अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मुहूर्त दोपहर से पहले का समय होता है जब सूर्य अपने उच्च प्रभाव में होता है। मान्यता है कि इस समय किया गया श्राद्ध शीघ्र फलदायक होता है। 2025 के अनुसार, आज कुतुप मुहूर्त लगभग 11:48 AM से 12:36 PM तक रहेगा (स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर संभव है)।