
नवरात्रि के नववें दिन, जिसे दुर्गाष्टमी भी कहा जाता है, मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। वर्ष 2025 में दुर्गाष्टमी और नवमी तिथि एक साथ आने से यह दिन और भी अधिक पुण्यदायी बन गया है। यह पर्व शक्ति उपासना का चरम बिंदु है, जब भक्तगण मां महागौरी से शांति, सौंदर्य, समृद्धि और मोक्ष की कामना करते हैं।
मां महागौरी का स्वरूप और महत्व
मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत सौम्य, श्वेतवर्ण और करुणामयी है। इनके चार हाथ होते हैं – एक में त्रिशूल, दूसरे में डमरू, और दो वर और अभय मुद्रा में होते हैं। श्वेत वस्त्र धारण करने वाली मां महागौरी जीवन की सभी नकारात्मकताओं को दूर कर के शुद्धता और शांत जीवन प्रदान करती हैं। कहा जाता है कि मां महागौरी की पूजा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और विवाह में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं।
पूजा विधि और शुभ मुहूर्त (2025)
दुर्गाष्टमी 2025 तिथि: 1 अक्टूबर 2025, बुधवार
महागौरी पूजन मुहूर्त: प्रातः 06:15 से 08:45 तक (स्थानीय पंचांग अनुसार)
पूजन विधि
प्रातः स्नान कर सफेद वस्त्र धारण करें।
मां महागौरी की प्रतिमा या चित्र पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत स्नान कराएं।
श्वेत फूल, अक्षत, रोली, चंदन और धूप-दीप से पूजन करें।
सफेद रंग की मिठाई जैसे नारियल बर्फी या खीर का भोग लगाएं।
कन्या पूजन करें — 8 या 9 कन्याओं को भोजन करवाना इस दिन विशेष फलदायक होता है।
महत्वपूर्ण मंत्र और आरती
मंत्र
"श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुभा।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥"
आरती:
"जय महागौरी जगत की माई,
चरणों में शीश धरूं मैं आई..."
श्रद्धापूर्वक व्रत, पूजन
नवरात्रि का नवां दिन यानी दुर्गाष्टमी, मां महागौरी की उपासना का सर्वश्रेष्ठ अवसर होता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत, पूजन और मंत्रोच्चारण करने से जीवन के सभी दोष समाप्त होते हैं और देवी कृपा से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से कन्या पूजन का अत्यंत महत्व है, जिसे करना न भूलें।