Akhand Jyoti Rules: नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के दौरान अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है। भक्त इसे देवी के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक मानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे नौ दिनों तक दीपक जलाकर मां की उपासना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। यही वजह है कि अखंड ज्योति जलाने वाले लोग इसकी लौ को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सावधानी बरतते हैं। हालांकि, कई बार हवा लगने, घी या तेल कम होने अथवा बाती में किसी तरह की परेशानी आने से दीपक बुझ सकता है। ऐसी स्थिति में परिवार के लोग चिंता करने लगते हैं और इसे किसी अनहोनी से जोड़कर देखने लगते हैं। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी परिस्थिति में शांत मन से पूजा की परंपराओं का पालन करते हुए दीपक दोबारा जलाया जा सकता है।
नवरात्रि में अखंड ज्योति बुझ जाए तो क्या करना चाहिए?
1. मां दुर्गा का स्मरण कर क्षमा प्रार्थना करें
अगर पूजा के दौरान अखंड ज्योति बुझ जाए, तो सबसे पहले मन को शांत रखें। हाथ जोड़कर मां दुर्गा का ध्यान करें और अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा मांगें। धार्मिक आस्था के अनुसार, पूजा में श्रद्धा और सच्ची भावना का विशेष महत्व होता है।
2. विधिपूर्वक दोबारा जलाएं दीपक
क्षमा प्रार्थना करने के बाद दीपक की जांच करें। घी या तेल कम हो गया हो, तो उसे आवश्यकतानुसार भरें और बाती ठीक करके ज्योति दोबारा प्रज्वलित करें। अगर बाती खराब हो गई है, तो उसे बदल सकते हैं। दीपक रखने की जगह को भी साफ रखें और उसे हवा से सुरक्षित स्थान पर रखें।
3. देवी मां को अर्पित करें भोग
अखंड ज्योति दोबारा जलाने के बाद मां दुर्गा को फल, मिठाई या अपनी श्रद्धा के अनुसार सात्विक भोग अर्पित करें। इसके बाद देवी से परिवार की सुख-शांति और मंगल की कामना करें। पूजा के दौरान मन में भय रखने के बजाय सकारात्मक भाव बनाए रखना बेहतर है।
अखंड ज्योति जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान
दीपक में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध घी या तेल रखें, ताकि वह बार-बार न बुझे। ज्योति को ऐसी जगह रखें जहां तेज हवा न आती हो और उसके आसपास ज्वलनशील सामान न हो। पूजा स्थल की स्वच्छता बनाए रखें और दीपक की नियमित रूप से सुरक्षित तरीके से देखभाल करें। मां दुर्गा को भोग लगाते समय साफ-सफाई और सात्विकता का ध्यान रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी की पूजा में तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल सामान्यतः नहीं किया जाता। पूजा की परंपरा के मुताबिक सामग्री चुनें। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। इस दिन भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी को भोग अर्पित करते हैं और पूजा करते हैं।
नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का क्या है महत्व?
हिंदू धार्मिक परंपराओं में अखंड ज्योति को भक्ति, आस्था और शुभता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के दौरान इसे जलाकर भक्त मां दुर्गा की निरंतर आराधना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और परिवार पर देवी की कृपा बनी रहती है। नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा से होती है। इसके बाद नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है और नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ कई घरों में हवन और कन्या पूजन किया जाता है।
यह भी पढ़ें: घर की सीढ़ियों के नीचे भूलकर भी न रखें ये 5 चीजें, जानें क्या रखना माना जाता है शुभ
ध्यान रखें कि अखंड ज्योति का बुझ जाना अपने आप में किसी अनहोनी का प्रमाण नहीं है। दीपक हवा, बाती या ईंधन की कमी जैसे सामान्य कारणों से भी बुझ सकता है। इसलिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ सुरक्षा और सावधानी को भी प्राथमिकता दें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।