Nayara Petrol Diesel Price Hike : नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की है। देश की प्रमुख निजी ईंधन कंपनियों में शामिल नायरा ने पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया है। कंपनी के देशभर में 7,000 से अधिक पेट्रोल पंप हैं। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती लागत के बीच खुदरा कीमतों और लागत के अंतर को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
https://twitter.com/PTI_News/status/2106272483074814054
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी आई है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 102.3 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। तेल बाजार में कीमत बढ़ने के पीछे वैश्विक घटनाक्रमों को अहम वजह माना जा रहा है। कच्चे तेल की लागत बढ़ने से तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ता है और इसका असर खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है।
नायरा ने पहले घटाए थे दाम
नायरा एनर्जी ने इससे पहले 1 जुलाई को पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। अब कंपनी ने दोनों ईंधनों के दाम फिर बढ़ा दिए हैं। इस साल कंपनी की ओर से ईंधन कीमतों में कई बार बदलाव किया जा चुका है। रिफाइनर कंपनियों को कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ रहा है।
ये भी पढ़ें : PAK आतंकी Shahzad Bhatti के नेटवर्क पर ATS का बड़ा एक्शन, UP के 15 जिलों में ताबड़तोड़ रेड, कई संदिग्ध हिरासत में
सरकारी कंपनियों ने नहीं बदले दाम
निजी कंपनी की ओर से कीमतें बढ़ाए जाने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने मई के बाद से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं किया है। देश के करीब 90 प्रतिशत पेट्रोल पंप इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन जैसी सरकारी कंपनियों के पास हैं। इसलिए नायरा के दाम बढ़ाने का असर फिलहाल उसके नेटवर्क से ईंधन खरीदने वाले ग्राहकों पर पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार पर टिकी नजर
तेल बाजार में आगे कीमतों की दिशा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव और वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। हाल में चीन से जुड़े ईंधन निर्यात और पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव की खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। ऐसे माहौल में निजी ईंधन कंपनियों के लिए लागत और खुदरा कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों की ओर से कीमतों में बदलाव को लेकर अभी कोई नया फैसला सामने नहीं आया है।