अक्सर आपने घरों या मंदिरों की दीवारों पर एक अजीब-सी आकृति देखी होगी—काला चेहरा, गोल आकार, निकली हुई जीभ और दो सींग। लोग इसे नजर बट्टू कहते हैं और मानते हैं कि यह घर को बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस नजर बट्टू की असली कहानी क्या है और इसका संबंध भगवान शिव से कैसे है? आइए जानते हैं इस रहस्यमयी आकृति की पौराणिक कथा, जो सुनकर आप हैरान रह जाएंगे।
नजर बट्टू की रहस्यमयी आकृति
नजर बट्टू दिखने में भयानक होता है। इसके लंबे कान, सींग और बाहर निकली जीभ इसे राक्षस जैसा स्वरूप देते हैं। इसे घर, मंदिर और दुकानों में लगाया जाता है ताकि वहां बुरी नजर का असर न हो।
पौराणिक कथा की शुरुआत
कहा जाता है कि बहुत समय पहले असुर जालंधर ने माता पार्वती को पाने के लिए भगवान शिव को युद्ध की चुनौती दी। उसने अपने दूत राहु को शिवजी के पास भेजा। राहु की बातें सुनकर शिवजी का क्रोध भड़क उठा और उनके क्रोध से एक भयानक जीव प्रकट हुआ। यह जीव न तो पूरी तरह मनुष्य था और न ही असुर।
शिवजी का आदेश और जीव की उत्पत्ति
शिवजी ने उस जीव को राहु को खाने का आदेश दिया। लेकिन राहु ने गलती मानकर क्षमा मांगी, जिसके बाद शिवजी ने जीव को राहु को न खाने का आदेश दिया। जीव ने कहा—“मेरा जन्म खाने के लिए हुआ है, तो मैं किसे खाऊं?” तब शिवजी ने उसे आदेश दिया कि वह स्वयं को खा जाए। आदेश मानकर उसने अपना पूरा शरीर खा लिया और केवल चेहरा ही बचा।
कीर्तिमुख नाम और महादेव का वरदान
शिवजी उसकी आज्ञाकारिता से प्रसन्न हुए और उसे कीर्तिमुख नाम दिया। साथ ही वरदान दिया कि वह लालच, छल और नकारात्मक भावनाओं को नष्ट करेगा। तभी से कीर्तिमुख को घर और मंदिरों में शुभ माना जाने लगा और इसे नजर बट्टू के रूप में लगाया जाने लगा।
घर-परिवार के लिए शुभ प्रतीक
कीर्तिमुख न केवल बुरी नजर से रक्षा करता है, बल्कि इसे वैभव, सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि आज भी लोग इसे घर, दुकानों और मंदिरों में लगाते हैं ताकि नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश न कर सके।